ज्योतिष मान्यता के अनुसार, आज के चंद्र ग्रहण का आपकी कुंडली पर हल्का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में इस प्रभाव को कम करने के लिए एक विशेष उपाय है। रक्षाबंधन के दिन सबसे पहला रक्षा सूत्र भगवान शिव को बांधें, उसके बाद दूसरा रक्षा सूत्र भगवान विष्णु को अर्पित करें और तीसरा रक्षा सूत्र अपने गुरु को बांधें। इन तीनों को विधिपूर्वक रक्षा सूत्र बांधने के बाद ही अपने प्रिय भाई की कलाई पर श्रद्धापूर्वक राखी बांधें।
आज के चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन इसके बावजूद राहुकाल के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए, क्योंकि यह समय अशुभ माना जाता है और इसका त्याग करना उचित रहता है। आज राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, इसलिए बहनों को इस अवधि में राखी बांधने से परहेज करना चाहिए।
आज भद्रा काल न होने के कारण रक्षाबंधन पर दिनभर राखी बांधी जा सकती है। इसके बावजूद सबसे पहला और सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जिसे राखी बांधने के लिए सर्वोत्तम समय माना जा रहा है। इसके अलावा भी दिन में कई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इनमें से एक अभिजीत मुहूर्त भी है, जो आज सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस समय भी बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
आज लगने वाला यह चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर शुरू हो चुका है और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर पूरी तरह समाप्त होगा। इस दौरान ग्रहण अपने चरम या मध्य काल पर सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर पहुंचकर सबसे अधिक प्रभावी हो गया है।
ज्योतिष गणना के अनुसार, वर्ष का यह आखिरी चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में घटित हो रहा है, जहां चंद्रमा के साथ राहु की भी मौजूदगी रहेगी। इसके साथ ही चंद्रमा पर सूर्य, बुध और केतु की सप्तम दृष्टि भी पड़ रही होगी, जिससे ग्रहों का यह समीकरण और जटिल बन जाता है। वहीं दूसरी ओर, उग्रता और आक्रामकता के प्रतीक माने जाने वाले मंगल ग्रह मिथुन राशि में विचरण कर रहे होंगे, जबकि शनि देव मीन राशि में वक्री चाल से गोचर करेंगे। इसी बीच बृहस्पति ग्रह भी अतिचारी अवस्था में गति कर रहे होंगे। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो ग्रहों की यह विशेष स्थिति इस चंद्र ग्रहण को उन क्षेत्रों और देशों के लिए अधिक असरदार बना देगी, जहां यह ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकेगा।
चंद्र ग्रहण के समय अमेरिका की राजधानी की कुंडली में वृषभ लग्न उदय हो रहा होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस कुंडली के दशम भाव में चंद्रमा और राहु एक साथ स्थित होंगे, जबकि चतुर्थ भाव यानी सिंहासन स्थान पर बुध और सूर्य की दृष्टि पड़ रही होगी। इसके अलावा मंगल की सातवीं दृष्टि और शनि की दसवीं दृष्टि भी इस कुंडली पर प्रभावी रहेगी। इन ग्रह स्थितियों के आधार पर ज्योतिषियों का मानना है कि आने वाले एक महीने में अमेरिका में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बनी रह सकती है। साथ ही कुछ जनआंदोलन और सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति भी बन सकती है।
स्कंद पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत को देवताओं को पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। यह देख राक्षस स्वरभानु चुपके से देवता का रूप धारण कर देवताओं की पंक्ति में जा बैठा और अमृत पीने लगा। सूर्य और चंद्रमा ने उसकी यह चालाकी पहचान ली और विष्णु जी को सच्चाई बता दी। क्रोधित होकर विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। चूंकि वह अमृतपान कर चुका था, इसलिए उसकी मृत्यु नहीं हुई। उसका सिर राहु और धड़ केतु कहलाया। इसी शत्रुता के कारण राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा को समय-समय पर ग्रहण के रूप में ग्रसित करते हैं।
साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंभ राशि के स्वामी शनि देव माने जाते हैं और वर्तमान में इस राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा व अंतिम चरण भी चल रहा है। वहीं शतभिषा नक्षत्र का स्वामित्व राहु के पास होता है। शनि और राहु, दोनों ही ग्रहों का यह संयोग होने के कारण ज्योतिषविदों ने कुंभ राशि वालों के साथ-साथ शतभिषा नक्षत्र में जन्मे जातकों को भी इस दौरान थोड़ा सतर्क और सावधान रहने की सलाह दी है।
यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण है। उपच्छाया से इसका पहला स्पर्श आज सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर लग चुका है । पूरे ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 35 मिनट रहेगी, जिसमें से खंडग्रास चंद्र ग्रहण यानी आंशिक चरण की अवधि 3 घंटे 16 मिनट की होगी। इस ग्रहण का चरम या सर्वाधिक प्रभावी काल सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर रहेगा।
आज सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण के साथ-साथ भद्रा का भी संयोग बना। लेकिन इसका रक्षाबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दरअसल, इस साल सावन पूर्णिमा तिथि 27 और 28 अगस्त दोनों दिन है, जबकि रक्षाबंधन का त्योहार आज यानी 28 अगस्त को मनाया जा रहा है। वहीं भद्रा काल की बात करें तो यह 27 अगस्त को प्रातः 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 54 मिनट तक ही सक्रिय रही। यानी भद्रा का पूरा प्रभाव 27 अगस्त तक ही सीमित रहा और आज 28 अगस्त को, जिस दिन रक्षाबंधन मनाया जा रहा है, भद्रा का साया बिल्कुल नहीं है।
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण किन राशि वालों को देगा कष्ट और किसे लाभ, पढ़ें सभी का हाल
पंचांग के अनुसार, आज यानी 28 अगस्त 2026 को यह चंद्र ग्रहण उपच्छाया रूप में सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर पूरी तरह समाप्त होगा। इस तरह ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 35 मिनट की रहेगी। इसमें खंडग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण का चरण करीब 3 घंटे 16 मिनट तक चलेगा, और ग्रहण का चरम काल सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर रहेगा।
Chandra Grahan 2026 Moon Timing Live Updates: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण आज, 28 अगस्त 2026 को लग रहा है, और खास बात यह है कि आज ही रक्षाबंधन का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। धार्मिक दृष्टि से चंद्रमा पर ग्रहण लगना शुभ नहीं माना जाता, इसी वजह से ग्रहण काल के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक या शुभ कार्य करने की मनाही होती है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले ही आरंभ हो जाता है। ऐसे में यह जानना और भी जरूरी हो जाता है कि आज का यह ग्रहण ठीक किस समय लगेगा और दुनिया के किन-किन हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा।
राखी पर पांच घंटे से ज्यादा रहेगा चंद्र ग्रहण का साया, जानें भारत में कब देगा दिखाई और क्या होगा प्रभाव