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अनियमित मासिक चक्र को सही करने के लिए जरूर करें ये प्रभावशाली आसन

Fri, 19 Mar 2021 09:50 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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 उष्ट्रासन - फोटो : social media
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उष्ट्रासन का अर्थ है ऊंट के समान मुद्रा बनाने वाला आसन। इसे आंग्लभाषा में केमल पोज भी कहा जाता है। यह आसन महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी है। मासिक चक्र को सही करने के लिए यह आसन बहुत प्रभावी है। साथ ही इन दिनों होने वाले दर्द को भी यह नियंत्रित करता है। जो बच्चे बचपन से इस आसन का अभ्यास करते हैं उनके शरीर में लचीलापन बना रहता है। कंधों को मजबूत बनाने के लिए भी इस आसन का अभ्यास करना चाहिए। आइए जानते हैं उष्ट्रासन करने का तरीका और उससे होने वाले लाभ। 

 उष्ट्रासन करने का तरीका-

जमीन पर चटाई बिछाकर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें। घुटने और कंधो के बीच की दूरी एक सी हो तथा पैरों के तलवे आसमान की ओर हो। पीछे की ओर झुकते हुए हाथों से पैरों के तलवों को छुएं। सांस लेते हुए पेट को आगे की तरफ खींचें ताकि संतुलन बना रहे। गर्दन पर बिना दबाव डाले एक जैसे बैठे रहें। इसी स्थिति में सांस लेते- छोड़ते रहें।

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उष्ट्रासन के लाभ-
पीठ और कंधों को मजबूती देता है।
कमर दर्द से छुटकारा दिलाता है।
रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है।
अनियमित मासिक धर्म की समस्या से छुटकारा दिलाता है।
वक्षों के आकार को सही करता है।
पेट, डबलचिन और कमर के मोटापे को कम करता है। 

नोट- गर्दन में चोट, गर्भवती महिलाओं और हाई- लो बीपी के मरीजों को उष्ट्रासन नहीं करना चाहिए। 

 

 

 

 

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