बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां पास हैं और आप भी अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकलकर कहीं घूमने की सोच ही रहे होंगे। अगर भीड़भाड़ से दूर शांत और खुशमिजाज वातावरण में छुट्टियों मानाने की जगह ढूंढ रहे हैं तो आज हम आपको उन जगहों के विषय में बताएंगे जहां जाकर एक पंथ दो काज हो जाएगा। यानि आप परिवार सहित घूम भी लेंगे और आपको विश्रांति भी मिलेगी। घूम आइए मनमोहक अल्मोड़ा के ये पांच स्थान।
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गोलू देवता को स्थानीय संस्कृति में सबसे बड़े और त्वरित न्याय के देवता के तौर पर पूजा जाता है। इन्हें राजवंशी देवता के तौर पर पुकारा जाता है। इस खूबसूरत मंदिर की खास बात ये है कि आप भगवान को चिट्ठी लिखकर अपनी मनोकामना पूरी कर सकते हैं। यहां पर आपको लाखों की संख्या में चिट्ठी व घंटियां देखने को मिल जाएंगी। ये मंदिर अल्मोड़ा से 8 किमी दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर स्थित है।
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जागेश्वर, अल्मोड़ा का प्रमुख धार्मिक स्थल है। अल्मोड़ा से करीब 35 किलोमीटर दूर घने जंगल में मौजूद जागेश्वर पहुंचते ही शांति का एहसास होता है। जागेश्वर की गणना भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंगों में की जाती है। यहां 7वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी के बीच करीब 125 मंदिर बनाए गए हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव के लिंग रूप की पूजा जागेश्वर से ही शुरू हुई। जागेश्वर को 'कुमाऊं का काशी' भी कहा जाता है।
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कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा से करीब 8 किमी की दूर कसार देवी गांव में स्थित है। कश्यप पर्वत पर स्थित ये प्रसिद्ध मंदिर दूसरी शताब्दी के समय का बना है। गुफानुमा जगह पर बने इस मंदिर में ही मां दुर्गा साक्षात प्रकट हुयी थी। इस मंदिर में मां दुर्गा के आठ रूपों में से एक रूप 'देवी कात्यायनी' की पूजा की जाती है।
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विश्व विख्यात 'कैंची धाम' अल्मोड़ा जाने वाले रास्ते में ही पड़ता है जो नैनीताल में स्थित है। कैंची धाम हनुमान जी का प्रमुख मंदिर है। ये मंदिर 'नीम करौली बाबा' के लिए भी जाना जाता है। जिन्हें हनुमान जी का धरती पर दूसरा रूप कहा जाता है।
अल्मोड़ा जाने के लिये ट्रेन से काठगोदाम या फिर रामनगर तक जाया जा सकता है। यहां से बस या फिर टैक्सी से 3 से 4 घंटे में अल्मोड़ा पहुंच सकते हैं। अल्मोड़ा जाने के लिए मार्च से जून या फिर सितंबर से दिसंबर तक का समय उचित रहेगा। जुलाई और अगस्त के महीने में यहां काफी बारिश होती है।