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आसान शब्दों में यहां समझें क्या है हाउस हस्बैंड टैग, जो समाज में लेकर आ रहा है सकारात्मक बदलाव

Wed, 04 Aug 2021 06:29 PM IST
संकल्प सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
चॉइस होती तो आज जॉब छोड़ देता: 'मेरा बस चलता तो आज ही नौकरी से इस्तीफा देकर घर की जिम्मेदारी संभाल लेता।' ये कहना है एक सरकारी दफ्तर में 10-5 की नौकरी करने वाले अभिजीत का। अभिजीत कहते हैं-'मेरी वाईफ ने पढ़ाई पूरी करने के बाद घर और बच्चों को संभालने का निर्णय लिया। उसको जॉब नहीं करना था। मैंने उसकी इच्छा का मान रखा। अगर मेरे पास ये ऑप्शन होता तो मैं भी इसको ही चुनता। मैं 19 साल की उम्र से जॉब कर रहा हूँ। आज 45 प्लस हूँ।

वही सेम रूटीन फॉलो करते करते बहुत बोर हो गया हूँ। मुझे वीकेंड के अलावा हर दिन फोटोग्राफी करनी है, पहाड़ों पर ट्रेकिंग करनी है, पेंटिंग एग्जीबिशन देखनी है। और ये सब करते हुए मैं घर और बच्चों को भी अच्छे से मैनेज कर सकता हूँ। लेकिन कभी अगर मजाक में भी ये किसी से कह दिया तो पहला वाक्य होता है- पागल हो क्या! सरकारी नौकरी भी कोई छोड़ता है! अब उनको कौन बताए कि सबकी अपनी पसंद हो सकती है।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
यह बात केवल एक अभिजीत की नहीं है। कई ऐसे पुरुष हैं जो खुशी से घर में रहकर गृहस्थी सम्भालने को तैयार हैं लेकिन अधिकांश मामलों में अब भी पुरुषों का घर सम्भालना समाज मे अच्छा नहीं माना जाता। अच्छी बात यह है कि अब धीरे धीरे खुद पुरुषों ने ही इस सोच से खुद को आज़ाद करना शुरू कर दिया है। वे इस नई भूमिका में सन्तुष्ट भी हैं और आत्मविश्वासी भी।

हम दोनों खुश तो दूसरों से क्या लेना: पिछले 10 सालों से भी ज्यादा समय से बतौर फ्रीलांस इंटीरियर डिजाइनर काम कर रहे मुक्तेश कहते हैं-'मेरी वाईफ अवनी एक डेंटिस्ट है। हम स्कूल के समय से एक-दूसरे के पड़ोसी रहे हैं। कॉलेज में आते आते हमारे परिवारों में भी हमारे रिश्ते को स्वीकृति मिल गई। अवनी शुरू से  जानती थी कि मुझे कोई जॉब करने में इंटरेस्ट नहीं है न ही मैं अपना फैमिली बिजनेस संभालूंगा। मुझे किसी के अंडर बंधकर काम करने की बिल्कुल भी आदत नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
इसलिए मेडिकल डिग्री पूरी होते अवनी ने तुरंत एक हॉस्पिटल जॉइन कर लिया और मैं तो अपना इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स पूरा करने के पहले से ही काम कर रहा था। आज मेरे पास कई बड़े क्लाइंट हैं और मैं अपनी मर्जी से अपना काम चुनता हूँ। अवनी के नए क्लिनिक का इंटीरियर भी ऑफकोर्स मेरा ही है और सबको पसन्द आ रहा है।'

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
'हमारी एक बेटी है जिसे पैदा होने के बाद से मैंने ज्यादा सम्भाला है। उसकी देखभाल करना, उसके साथ वक्त बिताना मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। मुझे इससे पॉजिटिविटी मिलती है। एन्ड यू नो। बच्चे गजब के क्रियेटर होते हैं। मुझे कई बार अपनी बिटिया के साथ खेलते हुए बहुत शानदार आइडियाज़ आये हैं। अवनी के वर्किंग अवर्स अलग अलग होते हैं इसलिए घर और बेटी की ज्यादा जिम्मेदारी मेरे ही पास होती है। मैंने कभी सोचा ही नहीं कि बाकी लोग इस बारे में क्या सोचते या कहते हैं। जब हम दोनों और हमारे परिवार वाले मेरे इस निर्णय से खुश हैं तो बाकी किसी चीज से कोई फर्क नहीं पड़ता।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
हाउस हसबैंड कोई शर्म की बात नही: जरा सोचिए कि जिन घरों में केवल लड़के ही हैं वहां यदि माँ के रूप में एक ही महिला हो और कोई उसका हाथ न बंटाए तो कितनी मुश्किल हो। आदमी और औरत होने से भी परे यह इंसानियत का भाव है। घर और बाहर की भूमिका यदि महिला-पुरुष दोनों मिलकर सम्भालते हैं या दोनो अपनी भूमिकाओं को एक-दूसरे से बदल लेते हैं तो गलत क्या है भला? असल बात है कि दोनों अपने निर्णय से खुश रहते हैं या नहीं।
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