डांटना या मारना किसी समस्या का समाधान नहीं है। आप टीनएजर्स को बहुत ज्यादा कंटोल नहीं कर सकते!
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बातें काम की:
* सबसे पहले तो बच्चे के कम्प्यूटर, मोबाइल, टैबलेट आदि पर समय बिताने के लिए नियम बनाएं। याद रखें इन नियमों का पालन आपको भी करना होगा, तभी बच्चे भी उसकी नकल करेंगे।
* यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर आप किड्स वाला ऑप्शन चुन सकते हैं। लेकिन कई बार इस पर भी गलत कंटेंट आ जाता है या फिर कई बार आपको बच्चों की एक्टिविटी के लिए सामान्य यूट्यूब की ही जरूरत हो सकती है। ऐसे में प्रोग्राम्स पर कंट्रोल करने की कोशिश करें।
* बच्चे को सामान्य शब्दों में यह समझाएं कि किस चीज को देखने से उसे बहुत फायदा होगा या क्या ज्यादा मनोरंजक होगा। इससे उसे प्रोग्राम चुनने में मदद मिलेगी।
* हफ्ते में कम से कम एक बार बच्चा क्या देख रहा है इस बात को चैक जरूर करें। इसके लिए 24 घण्टे बच्चे के पीछे पड़े रहने की जरूरत नहीं है। इस काम को सतर्कता से लेकिन धैर्य के साथ करें।
* यदि बच्चे के व्यवहार में कुछ भी अजीब लग रहा है। जैसे उसकी भाषा खराब हुई है, वह अकेले रहना पसंद करने लगा है, उसकी भूख और नींद पर असर पड़ा है, वह किसी बहाने से आपका डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेना चाहता है, अपने रूम में ही रहना पसंद कर रहा है, तो सतर्क हो जाएं और तुरन्त जांच करें कि कारण क्या हैं।
* अगर कभी गलती से बच्चे के सामने ऐसा कंटेंट आ जाये जो उसके लायक नहीं है, तो एकदम से उसे बंद करने की बजाय धीरे से बच्चे का ध्यान भटकाते हुए उसे बंद करें। अगर बच्चे ने उसे देख लिया है और कोई प्रश्न पूछा है तो उसे न डांटें न ही प्रश्न को टालें। सही तरीके से सामान्य भाषा में बच्चे को बताएं। साथ ही यह भी कहें कि इस बारे में हम और भी बात करते रहेंगे। इससे उनके मन मे यह विश्वास बनेगा कि उन्हें उनके सवाल का जवाब मिलेगा।
* डांटना या मारना किसी समस्या का समाधान नहीं है। आप टीनएजर्स को बहुत ज्यादा कंटोल नहीं कर सकते क्योंकि ये जेनरेशन टेक्नोलॉजी और गैजेट्स के बारे में हमसे ज्यादा जानती है। इसलिए बच्चों को लगातार बातचीत करने को प्रेरित करें।
* बच्चों में अच्छी और क्रिएटिव आदतें विकसित करना आपकी ही जिम्मेदारी है। कोशिश करें कि बच्चे वर्चुअल दुनिया के अलावा असली दुनिया से भी जुडें।