प्रतीकात्मक तस्वीर
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महत्वपूर्ण कानूनों में योगदान
मुथुलक्ष्मी ने बाल विवाह रोकथाम कानून, मंदिरों से देवदासी प्रथा खत्म करने, वेश्यालय बंद करने और महिलाओं व बच्चों की तस्करी रोकने के लिए कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिषद में विवाह के लिए लड़कियों की सहमति की उम्र को बढ़ाकर 14 करने वाले विधेयक को प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने कहा था, सती प्रथा में कुछ ही देर की पीड़ा होती है जबकि लड़की के बाल विवाह की प्रथा में उसे जन्म से लेकर मृत्यु तक एक बाल पत्नी, बाल मां और बाल विधवा के तौर पर जिंदगी भर की पीड़ा मिलती है।' उन्होंने अपनी किताब 'माय एक्सपीरियेंस एज लेजिस्लेचर' में इसका जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि जब उनका विधेयक बाल विवाह रोकथाम कानून स्थानीय प्रेस में प्रकाशित हुआ तो कट्टरपंथियों ने खुली बैठकों और प्रेस के जरिए उन पर हमला बोला। इसमें यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स भी शामिल थे।