मध्यकाल के महान कवि कबीर दास की जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस बार 5 जून, शुक्रवार यह तिथि पड़ रही है। ऐसी मान्यता है कि संवत 1455 में पूर्णिमा के दिन संत कबीर का जन्म हुआ था। कबीर दास ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में लगा दिया था। कबीर दास जी के विचार जीवन में नई उमंग और जोश भर देते हैं। आइए आज जानते हैं कबीर दास जी के अनमोल विचार...
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saint kabir das
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गुरु का महत्व
गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है, क्योंकि गुरु की शिक्षा के कारण ही भगवान के दर्शन होते हैं।
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दान
दान का महत्व
जिस तरह चिड़िया के चोंच भर पानी ले जाने से नदी के जल में कोई कमी नहीं आती, उसी तरह जरूरतमंद को दान देने से किसी के धन में कोई कमी नहीं आती ।
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कबीर दास
स्वंय चीजों को प्राप्त करें
पुरुषार्थ से स्वयं चीजों को प्राप्त करो, उसे किसी से मांगो मत।
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चीजों को कल पर न छोड़ें
जो कल करना है उसे आज करो और और जो आज करना है उसे अभी करो , कुछ ही समय में जीवन खत्म हो जाएगा फिर तुम क्या कर पाओगे ?
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हर पल भगवान का स्मरण करें
दुख के समय सभी भगवान को याद करते हैं पर सुख में कोई नहीं करता।यदि सुख में भी भगवान को याद किया जाए तो दुख हो ही क्यों ?
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मृत्यु अटल सत्य है
इस संसार का नियम यही है कि जो उदय हुआ है,वह अस्त होगा। जो विकसित हुआ है वह मुरझा जाएगा। जो छिना गया है वह गिर पड़ेगा और जो आया है वह जाएगा।
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निंदा करने वाले व्यक्ति को अपने आसपास ही रहने दें
जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने ज्यादातर पास ही रखना चाहिए। वो तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ करता है।