जाति, धर्म और संप्रदाय के तौर पर कितना भी भेदभाव हो, लेकिन राफिया के जीवन में योग के खास मायने हैं। वो कहती हैं कि, 'मैं चार साल की उम्र से योग कर रही हूं। ''एक इंसान के लिए परिवार के समर्थन से बढ़कर कुछ नहीं होता, फिर चाहे दुनिया में कितनी भी उंगलियां आप पर उठ जाएं फर्क नहीं पड़ता। राफिया आगे कहती हैं कि, 'योग मेरी जिंदगी है क्योंकि होश संभालने के बाद से ही मैं योग करती आ रही हूं और इसके लिए मैंने बहुत कुछ सहा है।'' योग जब जिंदगी बन जाए तो उसकी प्रेरणा और नींव काफी मजबूत होगी।
योग में इतना रम जाने की प्रेरणा आपको कहां से मिली पूछने पर राफिया कहती हैं- ' इसमें मेरे पिता का काफी योगदान है। पापा ने हमेशा मेरा समर्थन किया है। उन्होंने जब स्कूल में दाखिला कराया था तो वहां सुशांत सर योग सिखाया करते थे, उनसे मुझे काफी प्रेरणा मिली।' राफिया ने योग में काफी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2004 में ऑल इंडिया ओलंपिक्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित योग स्टेट चैंपियनशिप जीता है। इतना ही नहीं, योग प्रभा का खिताब, अपराजिता सम्मान, जम्मू और कश्मीर में नेशनल पतंजलि योग प्रमोटर सम्मान और 52 से अधिक गोल्ड मैडल भी अपने नाम किए हैं। लेकिन अफसोस कि इतने सम्मान हासिल करने और योग जैसी सकारात्मकता फैलाने के बावजूद उन्हें बदले में नफरत मिली।
वर्ष 2015 में बाबा रामदेव के साथ योग मंच साझा करने के बाद राफिया को कई मुश्किलों का सिर्फ इसलिए सामना करना पड़ा क्योंकि वो मुस्लिम हैं। इस विषय में राफिया कहती हैं- 2015 में मेरे ऊपर हमले किए गए, फतवे की धमकी दी गई, मेरे लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, बम से उड़ाने की धमकी मिली और घर पर पत्थर चलाए गए, लेकिन इन चीजों से डरकर मैंने हार नहीं मानी। भारत में ऐसा पहली बार हुआ जब मैंने इतने बड़े हुसैनी मदरसा में योग करवाया।'
राफिया नाज अनाथ बच्चों को भी योग की शिक्षा दे रही हैं। वो हजार से भी ज्यादा बच्चों को फ्री में योग सिखाती हैं। 2017 में कट्टरपंथियों द्वारा हमला होने के बाद उस समय 20 वर्ष की राफिया ने ठान ली की वो जाति, धर्म और संप्रदाय को योग में रोड़ा नहीं बनने देंगी और यहां से उनके संस्थान 'योग बियॉन्ड रिलिजन' की शुरुआत हुई। राफिया का कहना है की उन्हें विश्वास है एक दिन इंसाफ होगा और करारा जवाब तब मिलेगा जब उनके बच्चे भी योग करेंगे।
लोगों को योग दिवस पर बेहद खूबसूरत संदेश देते हुए राफिया कहती हैं- योग किसी धर्म और जाति की जागीर नहीं है, ये हमारी भारतीय संस्कृति है। हमें गर्व होना चाहिए कि हमने भारत में जन्म लिया। भारतीय होने के नाते हमे गर्व से भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहिए। मुझे गर्व है कि हमारे प्रधानमंत्री ने विश्व योग दिवस के लिए जो प्रस्ताव दिया वो पारित हुआ और हर भारतीय को गौरवान्वित होने का मौका मिला। योग को सिर्फ 21 जून तक समेत के ना रख दें बल्कि रोजाना योग करें।