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Indian Independence Day 2020: जानिए राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज की खास बातें

Sat, 15 Aug 2020 12:42 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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किसी भी देश के लिए उसका राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज काफी मायने रखता है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
किसी भी देश के लिए उसका राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज काफी मायने रखता है। आज भारत 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था। 15 अगस्त का दिन भारत में खास पर्व की तरह मनाया जाता है। हर नागरिक को अपने राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के बारे में जानकारी होनी चाहिए। राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज देश का गौरव होते हैं। अपने राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का हमेशा सम्मान करना चाहिए। आइए आज जानते हैं राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज की खास बातें...
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आजादी से पहले ही रवींद्रनाथ टैगोर ने जन-गण-मन..' यानी भारत का राष्ट्रगान लिख दिया था- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
  • राष्ट्रगान की खास बातें...

आजादी से पहले लिखा जा चुका था राष्ट्रगान
  • भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली थी। आजादी से पहले ही रवींद्रनाथ टैगोर ने 'जन-गण-मन..' यानी भारत का राष्ट्रगान लिख दिया था। जन-गण-मन पहली बार 1911 में राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था।
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राष्ट्रगान पूरे सम्मान और नियम से गाया जाएगा- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
24 जनवरी, 1950 में किया गया अधिगृहित
  • संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को "जन-गण-मन" को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अधिगृहित किया। संविधान सभा ने घोषणा की थी कि जन-गण-मन भारत का राष्ट्रगान होगा और इसे पूरे सम्मान और नियम से गाया जाएगा। आपको बता दें महर्षि अरविंद ने राष्ट्रगान का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया है।
अगली स्लाइड में जानिए राष्ट्रगान के नियम..

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राष्ट्रगान गाते समय अपने स्थान पर इसके अभिवादन में खड़ा होना जरूरी होता है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
राष्ट्रगान के नियम
  • राष्ट्रगान गाते समय अपने स्थान पर इसके अभिवादन में खड़ा होना जरूरी होता है। आपको बता दें राष्ट्रगान को गाने में कुल 52 सेकेंड का समय लगता है और इसमें पांच अंतरे हैं। 
अगली स्लाइड में जानिए राष्ट्रीय ध्वज के बारे में...
 
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राष्ट्रीय ध्वज के मध्य में हल्के नीले रंग का एक चक्र बना होता है, जिसमें 24 तीलियां होती हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
1947 में संविधान सभा द्वारा किया गया स्वीकृत
  • आजादी से कुछ समय पहले 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा द्वारा तीन रंगों से निर्मित ध्वज को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकृत प्रदान की गई थी। भारतीय ध्वज में तीन रंग होते हैं- गहरा केसरिया, श्वेत और गहरा हरा और राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 2:3 का होता है। झंडे के सबसे ऊपरी भाग में केसरिया, मध्य में श्वेत और सबसे नीचे हरा रंग होता है। राष्ट्रीय ध्वज के मध्य में हल्के नीले रंग का एक चक्र बना होता है, जिसमें 24 तीलियां होती हैं।
अगली स्लाइड में जानिए भारतीय ध्वज के रंगों और चक्र का महत्व...
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केसरिया रंग साहस, त्याग और बलिदान का प्रतीक होता है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
चक्र और रंग का महत्व
  • चक्र- इस चक्र को सारनाथ में स्थित अशोक के धर्म चक्र से लिया गया है और ये हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
  • केसरिया रंग- केसरिया रंग साहस, त्याग और बलिदान का प्रतीक होता है।
  • श्वेत रंग-   श्वेत रंग पवित्रता और सच्चाई का प्रतीक होता है।
  • हरा रंग- हरा रंग विश्वास और उर्वरता का प्रतीक होता है।
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