पुनरावृत्ति की चाहत
कई बार घर को समेटने के क्रम में हमें पुराने स्कूल बैग, कपड़े, कॉपियां, बच्चों द्वारा आड़ी-तिरछी रेखाओं में कागज पर बनाए गए चित्र और समुद्र से चुनकर लाई गई सीपियाँ मिल जाती हैं, जिन्हें कभी आपने बड़े जतन से इकट्ठा किया था। पुरानी चीजों से हमारी स्मृतियों का यही जुड़ाव हमें कभी उन वस्तुओं से दूर नहीं होने देता। बीबीसी के कार्यक्रम ‘द रिपेयर शो’ में भी एक बार ऐसी ही वस्तुओं के बारे में बताया गया, जिन्हें हम छोड़ना नहीं चाहते। उसमें बताया गया कि ऐसी वस्तुएं हमारी याद्दाश्त में से उन यादों को दोहराने और उनमें फिर से पहुंच जाने की भावनाओं को जगाती हैं। वस्तुतः यह मनुष्य का प्राकृतिक स्वभाव है। वह बहुत हद तक अपनी भावनाओं को वश में रखना चाहता है। यादों से जुड़ा रहना, उन्हें बार-बार और कभी-कभी न चाहते हुए भी याद करते रहना उसे अच्छा लगता है।
अच्छी नहीं हर याद
दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर और ‘रिमेंबरिंग फ्रॉम द आउटसाइड : पर्सनल मेमोरी एंड पर्सपेक्टिव माइंड’ पुस्तक के लेखक क्रिस मेकॉल अपनी पुस्तक में लिखते हैं,
“कई बार चीजें अपनी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में भी हमारी यादों में संजोई रहती हैं। जरूरी नहीं कि वस्तुओं से जुड़ी हमारी यादें हमेशा सकारात्मक ही हों। कई बार वे हमारी कड़वी स्मृतियों को भी ताजा करने का काम करती हैं।”
उनके अनुसार, ऐसा भी होता है कि किसी ने आपको कुछ दिया हो और बाद में उससे आपका मनमुटाव हो गया हो। वहीं, आपने बड़े प्यार से किसी के लिए कुछ खरीदा हो और उसने वह चीज आपको लौटा दी हो। इन दोनों ही परिस्थितियों में आपके सामने जितनी बार भी वह चीज आएगी, आपको बुरा लगेगा। इसलिए आप उन चीजों से दूरी बना लें और उन यादों को अपने घर और जिंदगी, दोनों से बाहर निकाल दें।
कुछ सुखद उदासियां भी
कभी-कभी वस्तुओं को न हटाने में उनसे जुड़ी सुखद ‘उदासियां’ भी जिम्मेदार होती हैं, जिनसे हम अनजाने में ही जुड़े रहते हैं। मसलन, कोई वस्तु आपको अपने किसी प्रिय व्यक्ति की याद दिला सकती है, जो अब आपके साथ नहीं है, लेकिन अतीत में उस व्यक्ति के साथ आपका रिश्ता बहुत अच्छा था। ऐसे में उस वस्तु से जुड़ीं सुखद स्मृतियां आपको उस प्रिय इन्सान की याद दिलाती रहती है और आप उस चीज के माध्यम से उससे हमेशा जुड़े रहना चाहती हैं, ताकि आपकी यादें यूं ही बनी रहें। हमारी ये आदतें घर को चीजों से भरती रहती हैं।
प्रोफेशनल डिक्लटर और ऑर्गेनाइजर सियान प्लेसचली इन चीजों की प्रकृति के बारे में उल्लेख करते हुए बताते हैं,
“हम किसी पुरानी वस्तु को देखकर किसी बुरी याद से उदास हो जाते हैं। वहीं, कुछ चीजें हमें आश्चर्यजनक रूप से सुखद उदासियां भी देती हैं, जो हमें अच्छा महसूस कराती हैं।”
यह ठीक है कि वस्तुएं हमें अतीत से जोड़ती हैं, हमें उनसे मोह भी हो जाता है, लेकिन हर वस्तु से जुड़ी हमारी याद वास्तव में घर को अजायबघर भी बना सकती है। इसलिए हमें थोड़ी बुद्धिमत्ता से इन से निपटना चाहिए, ताकि घर व्यवस्थित लगे और हमारी यादें भी सहेजी जा सकें। ऐसा इसलिए, क्योंकि घर ही एक ऐसा स्थान होता है, जहां हमारा अतीत अपने सम्मान के साथ और भविष्य अपनी महत्वाकांक्षा के साथ वर्तमान में रहता है। इसलिए घर को संग्रहालय बनने से पहले इन तरीकों से सहेज लें।
क्या है सबसे महत्वपूर्ण
हम उन चीजों को फेंकने से कतराते हैं, जो हमें किसी ने बड़े प्यार से दी होती हैं। हम ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि ऐसा करके हम उसकी यादों को खो देंगे। ऐसी चीजों को फेंकना हमारे लिए काफी कठिन होता है। ऐसे में इन्हें सहेजने के लिए आप एक छोटा-सा बॉक्स बनाएं, जिसमें महत्वपूर्ण लोगों द्वारा दी गई वस्तुओं में से ही कुछ चुनिंदा चीजों को रखा जा सके। इस तरह हम उन्हें बिना हमारी यादों और भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना आसानी से सहेज पाएंगे।
सहेजें तस्वीरों में
वस्तुओं से जुड़ी यादें और उनके प्रति हमारा मोह हमें उनसे दूर नहीं होने देता, मगर घर को व्यवस्थित रखना, नई चीजों को जगह देना और पुरानी चीजों को घर से दूर करना जरूरी है। इसलिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है कि आप उन महत्वपूर्ण चीजों की तस्वीरें और वीडियो बना लें तथा उन वस्तुओं को न फेंकने के मोह से मुक्त हो जाएं। आप घर के किसी कोने को थीम आधारित गैलरी में भी बदल सकती हैं, जहां आप उन वस्तुओं को करीने से सजाकर रख सकती हैं, जिन्हें आपने सालों से संभालकर रखा था। आप अपनी उन वस्तुओं की तस्वीर लेकर उन्हें फ्रेम करा कर दीवारों पर करीने से सजा सकती हैं। इससे घर भी सुंदर लगेगा और आपकी यादें भी आपके साथ घर में रहेंगी।
जब नए घर में जा रहे हों
नकारात्मकता हर हाल में बुरी होती है। इसलिए कभी इसे अपने ऊपर हावी न होने दें। आप हर उस वस्तु को हटाने की कोशिश करें, जो आपकी बुरी यादों से जुड़ी है। उसकी जगह उन्हीं वस्तुओं को संग्रहित करें, जिनसे आपकी अच्छी यादें जुड़ी हों। इससे आप में हमेशा खुशी का संचार होगा और सकारात्मकता आएगी। वस्तुओं से हमारा मोह घर को अव्यवस्थित कर देता है। घर में फालतू की चीजें जमा होती जाती हैं। फिर जब कभी आपको घर बदलने की जरूरत होती है तो उनसे निपटना एक सिर दर्द हो जाता है। हम उन्हें न तो फेंक पाते हैं और न रख पाने की हालत में होते हैं। खासकर, जब नया घर, नया शहर और नए माहौल में जाने की स्थिति आती है, तब अक्सर ही आपका मन भी असमंजस में पड़ जाता है।
इस मोह में खो जाने का डर
मनोचिकित्सक डॉ. एस. धनंजय बताते हैं, हर मनुष्य की आदत होती है आवश्यकता से अधिक धन और वस्तुओं को संचय करने की। हमें जिन चीजों की जरूरत नहीं भी होती, उन चीजों को भी खरीदते रहते हैं और पुरानी चीजों को संजोते रहते हैं। एक छोटे-से उदाहरण से इसे समझें। हम किसी उत्सव में अपनी थाली में आवश्यकता से अधिक रुचिकर भोजन भर लेते है, बस इस डर से कि कहीं वह समाप्त न हो जाए! शॉपिंग मॉल में डिस्काउंट खत्म होने से पहले जल्दी-जल्दी कपड़े, वस्तु आदि खरीद लेना चाहते हैं। वस्तुत: धन का संचय आपने अपने सुख, ऐश्वर्य और आराम की जिंदगी जीने के लिए किया है। आप पैसा कमाना, खर्च करना और दान देना भी जानते हैं, लेकिन यदि आप इसके प्रति मोह या आसक्ति रखते हैं तो उसके जाने से दर्द होता है।
मनोविज्ञान की भाषा में इसे परिग्रह कहते हैं। कई बार यह स्थिति उन लोगों में भी होती है, जिनके परिवार के किसी सदस्य को इस तरह का मोह हो। ऐसे लोग इस आदत को अपने परिवार के उस सदस्य को देख-देखकर सीखते हैं। हालांकि आनुवंशिकी इसका एक पक्ष हो सकती है, लेकिन आपके आस-पास का माहौल इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए आपको परिग्रह नहीं, बल्कि अपरिग्रह को अपनाना चाहिए, यानी किसी विचार, व्यक्ति या वस्तु के प्रति मोह या आसक्ति न होना।