आप गणित में अगर कच्चे हैं तो आपके प्रतिद्वंद्वी आपके बच्चे भी हो सकते हैं। हाल में हुए एक शोध की मानें तो तीन साल की उम्र तक के बच्चों में भी अंकों को लेकर बेहतर समझ होती है।
पढ़ें - दिमाग के लिए यह हो सकता है घाटे का सौदा
मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर केली मिक्स के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में सुझाया गया है कि स्कूल में प्रवेश के दौरान बच्चे और ज्यादा सीधे तरीके से गणितीय निर्देश समझने के काबिल होते हैं।
पढ़ें - झूठे को पहचानना है तो गौर करें यह फितरत
मिक्स ने कहा कि अब तक यही मान्यताएं रही हैं कि छोटे बच्चे प्लेस वैल्यू और मल्टी-डिजिट नंबरों को समझते नहीं हैं। जबकि हमने अपने अध्ययन में पाया कि वे वास्तव में इस बारे में बहुत कुछ जानते हैं।
बच्चे जब स्कूल में प्रवेश करते हैं, तब हमारी सोच से ज्यादा उनमें इन चीजों को लेकर समझ होती है। मिक्स ने अध्ययन के दौरान इंडियाना यूनिवर्सिटी की लिंडा स्मिथ और रिचर्ड प्राथेर के साथ मिलकर कई प्रयोग किए।
इसके तहत उन्होंने तीन से सात साल की उम्र के बच्चों में मल्टी-डिजिट नंबरों को पहचानने और तुलना करने की क्षमता का आकलन करने के लिए उनका परीक्षण किया। उदाहरण के तौर पर एक कार्य के दौरान अध्ययनकर्ताओं ने बच्चों को दो नंबर दिखाए और उनमें से कौन बड़ा है यह बताने को कहा। इसके काफी सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आए।
मिक्स ने कहा कि इस चौंकाने वाली खोज के पीछे संभवत: आज के बच्चों का फोन नंबर, स्ट्रीट एड्रेस से लेकर प्राइस टैग तक कई मल्टी=डिजिट नंबरों से सामना होना है। इस अध्ययन को ‘चाइल्ड डेवलपमेंट’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है।