सुबह से सिर दर्द हो रहा है तो एस्पिरिन या डिस्प्रिन ले लो ठीक हो जाएगा या फिर बदन में दर्द है तो कांबिफ्लेम या ब्रूफेन ले लो आराम मिल जाएगा।
अक्सर सिर दर्द, पेट दर्द या बदन दर्द को कम करने के लिए हम कुछ ऐसे पेनकिलर्स ले लेते हैं जिनसे हमें कुछ समय के लिए तुरंत आराम मिल सके। लेकिन हमारी थोड़ी सी लापरवाही इन दर्द की दवाओं को हमारे लिए ही दर्द बना सकती हैं।
दर्द से तुरंत आराम के लिए बिना प्रिस्क्रिप्शन मिलने वाली दवाएं 'ओवर द काउंटर ड्रग्स' (ओटीसी) कहलाती हैं जिनकी हल्की डोज से आपको आराम तो मिल जाता है लेकिन हमारी जरा सी चूक से हमें इनका साइड एफेक्ट भी झेलना पड़ सकता है।
ये हो सकते हैं साइड एफेक्ट्स
- कॉन्सटपिशन या लूज मोशन्स।
- गैस्ट्रो-इन्टेस्टाइनिल समस्याएं।
- पेट में अल्सर या ब्लीडिंग।
- मानसिक स्मस्याएं जैसे अनिद्रा, ध्यान न लगना आदि।
- श्वास संबंधी दिक्कतें।
- त्वचा पर चकत्ते और खुजली या जलन।
- लंबे समय तक पेन किलर के इस्तेमाल से लिवर और किडनी तक के खराब होने का खतरा हो सकता है।
एक्सपर्ट की राय
पेन किलर दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सीनियर फिजीशियन डॉ. के.सी. सूद का मानना है कि तेज दर्द में राहत के लिए ओटीसी दवाओं का हल्का डोज ले सकते हैं लेकिन इनपर निर्भरता बहुत खतरनाक हो सकती है।
लंबे समय तक इन दवाओं का बिना सोचे-समझे या बिना डॉक्टरी परामर्श के सेवन करने से किडनी खराब होने तक का खतरा हो सकता है।
हमेशा रखें इन बातों का ध्यान
पेन किलर दवाओं के साइड एफेक्ट्स से बचने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि आप पेन किलर लेते वक्त ऐसी कौन सी गलती कर रहे हैं जिससे आपको साइड एफेक्ट झेलना पड़ सकता है।
खाली पेट पेन किलर न लें - खाली पेट पेन किलर दवाएं लेने से शरीर में गैस्ट्रिक या एसिडिटी बहुत अधिक बढ़ जाती हैं जिससे तबियत और बिगड़ सकती है। हमेशा पेन किलर लेने से पहले थोड़ी डाइट जरूर लें।
एल्कोहल से बरतें दूरी - एल्कोहल और पेन किलर का कांबिनेशन आपको स्ट्रोक या हार्ट अटैक तक की स्थिति में पहुंचा सकता है। चूंकि पेन किलर दवाएं और एल्कोहल, दोनों ही एसिडिटी बढ़ाते हैं तो आप सोच सकते हैं कि इन दोनों का प्रभाव कितना नकारात्मक हो सकता है।
पानी की कमी न होने दें - भले ही आप दवा दो घूंट पानी से लेते हों लेकिन दवा लेने के बाद शरीर में पानी की कमी न हो इसका पूरा ध्यान रखें।
आप जब दवा लेते हैं तो किडनी के पूरे सिस्टम पर उसका सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अच्छी मात्रा में पानी के सेवन से दवाओं का टॉक्सिन तेजी से शरीर से बाहर निकलता है और साइड एफेक्ट की आशंका कम हो जाती है।
दवा को तोड़ कर या क्रश करके न लें - कई बार लोगों को पूरी गोली निगलने में दिक्कत होती है, खासतौर पर बच्चे दवा खाने में बहुत आनाकानी करते हैं। ऐसे में हम दवाओं को तोड़कर या क्रश करके उन्हें खिला देते हैं।
ऐसे में दवा का पूरा डोज तेजी से शरीर में घुलता है और कई बार हमारा शरीर उसके प्रभाव को संभाल नहीं पाता और यह दवा के ओवरडोज की तरह काम करता है।
ऐसे में अगर आपको पूरी एक टैबलेट लेनी है तो उसे तोड़कर लेने के बजाय पूरी निगलें। हां, दवा के आधे डोज के लिए तोड़ने में कोई दिक्कत नहीं है।
इसे अपनी लत न बनाएं - कई बार लोग थकान मिटाने और दर्द से आराम के लिए पेन किलर दवाओं के इतने आदी हो जाते हैं कि दवाएं उनके रुटीन का हिस्सा हो जाती हैं।
लंबे समय तक इनका इस्तेमाल किडनी, लिवर और कई मानसिक समस्याओं का कारण हो सकता है।
एक बार में एक से अधिक पेन किलर न लें- दर्द कितना भी तेज हो लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप में एक से अधिक पेन किलर लें।
किसी भी पेन किलर का प्रभाव पता चलने में कम से कम 15 से 30 मिनट तो लगते ही हैं। ऐसे में अगर आप बेसब्र होकर पेन किलर की ओवरडोज करेंगे तो ब्लीडिंग, किडनी फेल्योर, दिल का दौरा, ब्लड क्लॉटिंग जैसे साइड एफेक्ट हो सकते हैं।
पेन किलर दवाओं की हल्की डोज आपके दर्द को राहत पहुंचाने के लिए ही है, लेकिन कई बार हमारी जरा सी लापरवाही दर्द कम करने के बजाय हमारे लिए और बड़े दर्द का सबक हो सकती है।