ब्रिटेन के एक हृदयरोग विशेषज्ञ ने सैचुरेटेड फैट को लेकर आमतौर पर दी जाने वाली सलाह से अलग राय दी है।
डॉ. असीम मल्होत्रा का कहना है कि इससे जुड़े जोख़िम को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया गया है, जबकि चीनी का सेवन करने जैसे दूसरे कारकों को नजरअंदाज़ किया गया है।
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उन्होंने ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अपने लेख में कहा है, "अब समय आ गया है कि हम हृदय रोग को लेकर सैचुरेटेड फैट की भूमिका के बारे मे मिथक को खत्म करें।"
दूसरी ओर ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने कहा है कि दवाओं या दूसरे तरीकों से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में कमी करके हृदय रोगों का जोख़िम कम होता है।
खानपान और रोगों के बीच संबंधों को लेकर हुए अध्ययन के आधार पर इस बात की सलाह दी जाती है कि स्वस्थ जीवन के लिए सैचुरेटेड फैट की कितनी मात्रा लेनी चाहिए।
वैज्ञानिक प्रमाण
ब्रिटेन में लाखों लोगों को कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए स्टैटिन लेने की सलाह दी जाती है।
लंदन स्थित क्रायडन यूनीवर्सिटी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी रजिस्ट्रार डॉ. मल्होत्रा ने बताया, " हृदय रोगों के जोख़िमों को रोकने के लिए करीब चार दशक से सैचुरेटेड फैट को कम करने की सलाह दी जाती रही है।"
उन्होंने कहा कि सैचुरेटेड फैट को दोषी ठहरा दिया गया है लेकिन वैज्ञानिक प्रमाणों से इसका हृदय रोगों के साथ पूरी तरह संबंध स्थापित नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि खाद्य उद्योग ने सैचुरेटेड फैट को कम करके उसकी जगह चीनी के इस्तेमाल को बढ़ाया है, जबकि चीनी खुद हृदय रोगों के लिए ज़िम्मेदार है।
खानपान और बीमारियों के बीच संबंधों को लेकर होने वाले अध्ययन अक्सर विरोधाभासी नतीजे देते हैं।
डॉ. मल्होत्रा ने लिखा है कि स्टैटिन की जगह जैतून का तेल, बादाम, तैलीय मछली, फलों और सब्जियों के साथ रेड वाइन की थोड़ी मात्रा जैसे मेडिटेरेनियन खानपान को अपनाकर हृदय रोगों की आशंका की काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्टैटिन का असर
हालांकि ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के प्रोफेसर पीटर वेइसबर्ग ने कहा है कि खानपान और बीमारियों के बीच संबंधों को लेकर होने पर अध्ययनों के दौरान अक्सर विरोधाभासी नतीजे समाने आते हैं।
उन्होंने कहा कि दवाओं के परीक्षण के विपरीत एक नियंत्रित और बेतरतीब अध्ययन करना मुश्किल होता है।
उन्होंने बताया, "हालांकि अत्यधिक कोलेस्ट्राल स्तर वाले लोगों को हार्ट अटैक की आशंका अधिक होता है और यह भी साफ़ है कि कोलेस्ट्राल को कम करने का मतलब है जोख़िम को कम करना।"
उन्होंने बताया कि कोलेस्ट्राल का स्तर कई बातों के प्रभावित होता है। इसमें खानपान, कसरत और दवाओं का इस्तेमाल शामिल है।
उन्होंने कहा कि इस बात के भी स्पष्ट सबूत हैं कि स्टैटिन से लोगों को फ़ायदा मिला है।