हाल में वैज्ञानिकों ने किशोरों की लार के परीक्षण से उनकी मानसिक सेहत से जुड़े कई अहम पहलुओं का पता लगाया है।
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में किशोरों की लार के परीक्षण से यह पता लगाया है कि कि उन्हें भविष्य में अवसाद जैसे मानसिक रोगों की कितना आशंका हो सकती है।
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उन्होंने शोध में पाया कि जिन लड़कों के शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिजोल का स्तर अधिक है, उन्हें भावी जीवन में अवसाज जैसी मानसिक समस्याओं का रिस्क 14 गुना अधिक है।
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शोधकर्ताओं का मानना है कि 2030 तक अवसाद दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक होगी।
शोधकर्ता इयान गुडियर के अनुसार, ''हमने अपने शोध में किशोरों में छिपे अवसाद के लक्षणों को सही समय पर पता कर उनका उपचार करने की तकनीक विकसित की है। इससे युवाओं में बढ़ती मानसिक समस्याओं को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।''
यह शोध प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल अकैडेमिक्स साइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है।