क्या आपको पता है कि दुनिया का सबसे महंगा हैम कहां होता है?अगर नहीं, तो चलिए आज आप को उस जगह की सैर कराते हैं।दक्षिणी यूरोप के आइबेरियन प्रायद्वीप पर दो देश आबाद हैं. पुर्तगाल और स्पेन, ये दोनों ही देश अपनी अलग तहज़ीब के लिए जाने जाते हैं।एक दौर था, जब इन दोनों ही देशों ने पूरी दुनिया में विशाल साम्राज्य कायम किया हुआ था।स्पेन की हुकूमत दक्षिणी अमरीका के ज़्यादातर देशों में थी।मेक्सिको भी उसका गुलाम था।वहीं, पुर्तगाल के लोगों ने फिलीपींस से लेकर ब्राजील तक अपना साम्राज्य स्थापित किया हुआ था।
खैर, आज बात इनके साम्राज्य की नहीं, बल्कि स्पेन में तैयार किए जाने वाले दुनिया के सबसे महंगे सुअर के गोश्त यानी हैम की,ये इतना महंगा है कि दाम सुनेंगे तो आप के होश उड़ जाएंगे।सुअर की एक टांग क़रीब सवा तीन लाख रुपए की बिकती है।पर, इन्हें तैयार किस तरह से किया जाता है, वो जानने के बाद आपको ये क़ीमत वाजिब लगेगी।
आइबेरियन प्रायद्वीप में पिछले दो हज़ार साल से भी ज़्यादा पहले से सुअर का गोश्त बड़े चाव से खाया जाता रहा है।रोम के कवि मार्शल ने पहली सदी ईस्वी में आज के स्पेन में सुअर का मांस खाने का ज़िक्र अपनी किताब में किया था।तब से लेकर आज तक स्पेन के ग्रामीण इलाक़ों में हर जश्न में सुअर की बलि देने का रिवाज है।बलि देने के बाद बाक़ी गोश्त तो तुरंत पकाकर खा लिया जाता है. पर, उसके पिछले पैरों और ख़ास तौर से पुट्ठों को रख लिया जाता है।
इन्हें सुखाकर ही हैम तैयार होता है।जमोन या हैम, स्पेन की संस्कृति का अहम हिस्सा है। छोटे गांव हों या बड़े शहर, स्पेन में हर जगह सुअर के गोश्त की बड़ी अहमियत है।स्पेन के लोग हर साल करीब एक लाख साठ हजार टन सुअर का मांस चट कर जाते हैं,दुनिया के किसी और देश में सुअर का मांस इतनी तादाद में नहीं खाया जाता।हैम यूं तो हर सुअर के पुट्ठे से तैयार हो सकता है. मगर स्पेन की ख़ास काली नस्ल की सुअरों के हैम को सबसे स्वादिष्ट माना जाता है।
एदुआर्दो का सुअर फ़ार्म के पास ही एक नेशनल पार्क है। ये संरक्षित इलाक़ा है।यहां पेड़ों की कटाई नहीं होती ,नतीजा ये कि उनकी सुअरों को साल भर प्राकृतिक तौर पर खाना उपलब्ध रहता है।
वो एक्रोन यानी ओक के पेड़ के फल खाकर पेट भरते हैं यही वजह है कि इन सुअरों का मांस अलग ही तरह का स्वाद देता है।जो फल और बीज यहां मिलते हैं, वो सेहत के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं।ये बात ख़ुद अमरीका का नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फ़ार्मेशन कहता है।यहां पर शाहबलूत के पेड़ों की कई नस्लें मिलती हैं, जो अलग-अलग वक़्त पर फल देती हैं।सो सुअरों के लिए साल भर खाने का इंतज़ाम होता है।
आइबेरिया की सुअरें आम तौर पर काले रंग की होती हैं।मगर, एदुआर्दो की भेड़ों का रंग सुनहरा भूरा होता है.इनके शरीर पर चकत्ते होते हैं।ये नस्ल काली सुअरों की ज्यादा मांग की वजह से कमोबेश खत्म हो चली थी. मगर आज एदुआर्दो के फार्म में ये आबाद हैं।इस नस्ल के सुअर को काटने से पहले करीब तीन साल तक पाला-पोसा जाता है।तभी इनका हैम अच्छा तैयार होता है।सही वजन होने पर सुअरों को काट कर उसके पिछले पैर अलग कर लिए जाते हैं. बाक़ी मांस को तो तुरंत इस्तेमाल किया जाता है।
इस हैम को स्लाइस करने यानी पतली परत में काटने का हुनर भी अलग होता है. इसके लिए भी हुनरमंद लोग ही बुलाए जाते हैं।वो काट कर चखने वालों के सामने हैम के टुकड़े रखते जाते हैं. ऊपरी हिस्से के मांस का अलग स्वाद होता है. वहीं खुरों के पास के टुकड़ों का स्वाद अलग तरह का होता है।स्पेन के बड़े और मशहूर रेस्टोरेंट में हैम को काटने के बड़े आयोजन हुआ करते हैं. इन्हें सामान्य तापमान पर काटकर तुरंत परोसा जाता है, ताकि स्वाद न बिगड़े एदुआर्दो कहते हैं कि, 'हम पैसे कमाते हैं जीने के लिए. न कि पैसे कमाने के लिए जी रहे हैं।तभी तो, वो दुनिया का सबसे महंगा हैम तैयार कर रहे हैं।