अगर आपका वजन बढ़ रहा है तो सावधान हो जाइए। यह आपको कैंसर रोगी भी बना सकती है। पित्त की थैली में वसा की परत जमने से यह खतरा खड़ा होता है। पथरी पित्त की थैली में कैंसर का दूसरा बड़ा कारण है।
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एसएन मेडिकल कालेज के रेडियो डायग्नोसिस विभाग में साल में 30-35 मरीजों में पित्त की थैली का कैंसर पाया गया है। ये हाइट के सापेक्ष ज्यादा वजन और मोटापे का शिकार थे। इनमें 70 फीसदी महिलाएं हैं। बीते दो साल में ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
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इन लक्षणों पर गौर करें
पेट के दाहिनी हिस्से में दर्द रहना।
भूख न लगना व जी मिचलाना।
ऐसे करें बचाव
फिटनेस पर ध्यान दें, वजन न बढ़ने दें।
पित्त थैली में पथरी हो तो इलाज कराएं।
तीखा, बंद डिब्बे के खाने से भी कैंसर
तीखा, ज्यादा स्पाइसी और लंबे समय तक डिब्बे में बंद भोजन से खाने की नली में कैंसर हो सकता है। विटामिन और आयरन की कमी से भी यह रोग संभव है।
तंबाकू-लापरवाही से बढ़ रहे मरीज
एसएन में हर माह आने वाले 150 से अधिक कैंसर मरीजों में 70 प्रतिशत मुंह, गले का कैंसर से पीड़ित होते हैं। अधिकांश तंबाकू के आदी लोग हैं। हर महीने सर्वाइकल के 12-15 और ब्रेस्ट कैंसर के भी इतने ही मरीज आते हैं। रोग का बड़ा कारण महिलाओं का जागरूक नहीं होना है।
उपचार के बाद भी जख्म सही न हो और गले-मुंह में दर्द हो तो फौरन डाक्टर को दिखाएं। शुरूआती दौर में उपचार कैंसर से बचा सकता है।
डॉ. अशोक कुमार आर्या, विभागाध्यक्ष, रेडियो डायग्नोसिस, एसएन मेडिकल कालेज के अनुसार, 'झिझक के चलते महिलाएं सर्वाइकल, ब्रेस्ट कैंसर की जांच नहीं करातीं। हालत बिगड़ने पर शुरू होता है। इसका साल में दो बार चेकअप जरूरी है।'