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क्या आप रंग के नाम पर केमिकल्स की होली खेलते हैं?

Mon, 25 Mar 2013 12:00 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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होली के दिन रंग-गुलाल से धमाल न हो तो बात ही क्या। लेकिन कहीं आप इस धमाल-मस्ती के दौरान रंगों के नाम पर केमिकल्स की होली तो नहीं खेल रहे?
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जनाब, बाजार में बिकने वाले सस्ते रंग भले ही आपकी जेब को सूट करें लेकिन इनमें मौजूद केमिकल्स आपकी सेहत के लिए किसी जहर से कम नहीं।

फोर्टिस अस्पताल के चीफ कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जन डॉ. अजय कश्यप ने अमर उजाला को इस बारे में बताया, 'होली पर बाज़ार में बिकने वालेवाले ज़्यादातर रंग ऑक्सीडाइज़्ड मेटल होते हैं या इंजन ऑयल के साथ इन्डस्ट्रियल डाई को मिक्स करके तैयार किए जाते हैं। इसलिए ये आपकी सेहत पर भारी पड़ सकते हैं।'

जानिए, इन केमिकल्स से भरे रंगों का आपके शरीर पर क्या असर हो सकता है।

चमकीले हरे रंग में कांच का बुरादा
हरा रंग कॉपर सल्फेट से, परपल क्रोमियम आयोडाइड से, सिल्वर एलुमीनियम ब्रोमाइड से और काला रंग लैड ऑक्साइड को मिलाकर तैयार किया जाता है। इस रंग को चमकदार बनाने के लिए अक्सर रंग में कांच का बुरादा मिलाया जाता है।
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वहीं हरे रंग में मौजूद कॉपर सल्फेट अगर आंखों में चला जाए तो यह आंखों में एलर्जी और अस्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है।

काले रंग से किडनी हो सकती है खराब
काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड रीनल फेलियर यानी किडनी खराब होने का कारण बन सकता है। यह व्यक्ति की सीखने की क्षमता को भी समाप्त कर सकता है।

बैंगनी रंग से हो सकता है दमा
बाजार में बिकने वाले बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है जो ब्रोंकियल अस्थमा और एलर्जी पैदा कर सकता है।

सिल्वर और लाल
सिल्वर रंग बनाने में एलूमिनियम ब्रोमाइड का इस्तेमाल करते हैं जो कार्सिनोजेनिक हो सकता है यानी कैन्सर तक पैदा कर सकता हैं जबकि लाल रंग में इस्तेमाल होने वाला मर्करी सल्फाइट त्वचा के कैंसर का कारण तक हो सकता है।

चुनें इको फ्रेंडली रंग
ऐसे में समझदारी यही है कि बाजार में बिकने वाले केमिकल्स से भरे रंगों के बजाय आप घर पर ही रंग बनाएं या फिर इको फ्रेंडली रंगों की होली खेलें।

घर पर नेचुरल कलर्स बनाने के लिए यहां क्लिक करें।
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