क्या कहती है रिपोर्ट और क्यों होता है मलेरिया
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क्या कहती है रिपोर्ट, और क्यों होता है मलेरिया
यह रिपोर्ट सीधे शब्दों में बताती है कि भारत एकमात्र देश है जिसने मलेरिया के मामलों में गिरावट दर्ज की है। इस रिपोर्ट में दुनिया में मलेरिया से सर्वाधिक पीड़ित 11 देश शामिल हैं। भारत की तुलना में अफ्रीकी देशों में लोग मलेरिया के ज्यादा शिकार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीका के नाईजीरिया में 25% लोग, कांगो में 11 प्रतिशत, मोजाम्बिक यू में 5 प्रतिशत और युगान्डा में 4 प्रतिशत मलेरिया से ग्रसित थे। इसके अलावा अफ्रीका में 15 और ऐसी जगह हैं जहां के लोग मलेरिया से एक लंबे समय से ग्रस्त हैं।
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यह रिपोर्ट इस बात की ओर भी इशारा है कि अफ्रीका में मलेरिया से मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि अफ्रीका के शहरी इलाके में मलेरिया का प्रकोप कम नजर आता है, जबकि ग्रामीण इलाकों में ज्यादा नजर आता है। वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन के वॉलेंटियर जब इन अफ्रीकी देशों के ग्रामीण इलाकों में मलेरिया के रोगियों का जायजा लेने पहुंचे तो पता चला कि इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह गंदगी है।
गंदगी और स्वच्छता का अभाव मलेरिया की सबसे बड़ी वजह है।
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दरअसल, अफ्रीकी गांव के लोगों का रहन-सहन और जीवनस्तर में गिरावट है। गरीबी इनके लिए एक अभिश्राप है और गंदगी की वजह से ये लोग कर्इ बीमारियों से जूझ रहे हैं। यहां नालों की सफाई नहीं है और गांव के अंदर जगह-जगह गंदा पानी भरा हुआ है जबकि अस्पतालों की हालत खराब है और सामान्य सुविधाओं के अभाव में लोगों का सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा है।
श्रीलंका की तुलना में क्या है भारत की स्थिति
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भारत में क्या है मलेरिया की स्थिति
भारत मलेरिया की बात करें तो हमारा देश भी उन 15 मलेरिया प्रभावित देशों में तीसरे स्थान पर आता है। भारत सरकार स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार साल 2016 में इंडिया में 4 लाख से भी ज्यादा मलेरिया के मामले सामने थे जिसमें से 100 लोगों की मौत मलेरिया से हुई थी, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने कहा था कि भारत 2030 तक पूरी तरह मलेरिया मुक्त हो जाएगा।
श्रीलंका से सबक लेगा भारत
यह बड़ी चौंकाने वाली बात है कि एशिया में श्रीलंका ने भारत से पहले मलेरिया की जंग को जीत लिया। 5 सितंबर 2016 को आर्इ डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में श्रीलंका को मलेरिया मुक्त कर दिया, जबकि इंडिया के लिए यह रिपोर्ट सदमे वाली रही। दरअसल, मलेरिया ने 1990 के दशक में ही मलेरिया से लड़ने के लिए जागरूकता दिखार्इ थी। मलेरिया के खिलाफ नीति में श्रीलंका में ना केवल मच्छरों के पनपने की रोकथाम बल्कि इस बीमारी के मुख्य कारण अमीबिक पैरासाईट को पूरी तरह से समाप्त करने की प्लानिंग की। मलेरिया से प्रभावित इलाकों में कैंप लगाए गए और मोबाइल क्लीनिक की व्यवस्थाएं की गर्इं। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2005 में श्रीलंका में केवल 1000 मलेरिया के मामले सामने आए जबकि चौंकाने वाली बात रही कि साल 2012 में श्रीलंका में एक भी मामला मलेरिया का सामने नहीं आया।
मलेरिया के लक्षणों को समझना जरूरी है।
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मलेरिया से आप भी रहें अलर्ट, जानें क्या हैं लक्षण
ज्यादा तेज सिरदर्द
ठंडा लगना और मिचलाहट होना
नाक से खून निकलना
हाथ-पैर में कंपकंपी
ज्यादा प्यास लगना
कमजोरी होना
बुखार आना और उतरना
मलेरिया से रोकथाम के लिए जरूरी हैं उपाय।
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मलेरिया से रोकथाम
ऐसे कपड़े पहने जो पूरे शरीर को ढ़के
घर के आस-पास साफ-सफाई आवश्यक रूप
रोज काला हिट स्प्रे करें
घर में गंदा पानी न रखें
बिना डॉक्टर के सलाह के डाइट नहीं लेनी चाहिए।
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विशेषज्ञों का कहना हैं मलेरिया जैसे गंभीर बीमारी होने पर हमें अपने डाइट का खास ध्यान रखना चाहिए। बिना डॉक्टर के सलाह के डाइट नहीं लेनी चाहिए।मलेरिया में खाने की कुछ चीजों को परहेज भी करना बहुत जरूरी होता है।
मलेरिया में क्या खांए-
चाय,दूध,कॉफी,तुलसी पत्तें,अदरक,
मलेरिया में सेब फायदेमंद होता है।
दाल,चावल की खिचड़ी,दलिया खाया जा सकता है।
अमरूद खाने से बहुत फायदा होता है।
मलेरिया में क्या न खांए
ठंडा पानी से दूर रहे
आम,संतरासअनार का बिल्कुल सेवन न करें
ऐसी में न सोए
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