कोरोना रोगियों में देखने को मिल रही है हृदय रोगों की दिक्कत
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कोविड संक्रमण की दूसरी लहर का असर शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते संक्रमितों में कई प्रकार के लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि जो लोग कोरोना संक्रमण से ठीक होकर लौट रहे हैं उनमें लॉन्ग कोविड का भी खतरा बना रहता है। कई अध्ययनों में यह भी बताया जा रहा है कि कोरोना का संक्रमण रोगियों के हृदय को भी प्रभावित कर सकता है। कोविड के हृदय पर होने वाले प्रभावों को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर शनिवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों ने इसी विषय के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान मेदांता इंदौर में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अल्केश जैन ने सभी संबंधित सवालों के जवाब दिए।
हृदय के लिए कितना नुकसानदायक है कोरोना संक्रमण
इस सवाल के जवाब में डॉ.अल्केश कहते हैं कि कोरोना के रोगियों में संक्रमण के दौरान हृदय से जुड़ी कई तरह की बीमारियों के बारे पता चल रहा है। कुछ मरीजों के हृदय के भीतर की नलियों में खून का थक्का जमने की समस्या का भी निदान किया गया है। यही कारण है कि कोरोना के कई रोगियों को दिल का दौरा भी पड़ रहा है। कोरोना से ठीक हो चुके रोगियों में भी हाल के दिनों में हार्ट अटैक और हृदय के अन्य रोगों का खतरा ज्यादा देखने को मिला है।
कैसे किया जाता है प्रारंभिक इलाज
डॉ अल्केश कहते हैं कि जिन संक्रमितों में हृदय रोगों का निदान होता है उन्हें इलाज के दौरान ही खून को पतला करने वाली दवाइयां और इंजेक्शन दे दी जाती हैं। इसके अलावा होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना के कई रोगी पल्स रेट कम होने की भी शिकायत कर रहे हैं, ऐसे रोगियों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कोरोना की पहली लहर में इस तरह के मामले देखने को नहीं मिल रहे थे, लेकिन वायरस के म्यूटेशन के बाद नए स्ट्रेनों ने रोगियों में हृदय रोग की समस्याओं को बढ़ा दिया है।
कोरोना संक्रमितों में अचानक से कम हो जा रहा है पल्स रेट
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अचानक से पल्स रेट कम होने पर क्या करें?
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अल्केश जैन कहते हैं कि पिछले दिनों हमने कई ऐसे मामले भी देखे हैं जिसमें रोगियों की पल्स रेट अचानक से 25 से 30 के बीच पहुंच जा रही है। ऐसी स्थिति में रोगियों को घबराना नहीं चाहिए, उन्हें इस बारे में किसी हृदय रोग विशेषज्ञ से बात करना चाहिए। अब तक ऐसे कोई भी मामले देखने को नहीं मिले हैं जिसमें पल्स रेट कम होने के कारण रोगियों को कोई गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा हो। कोविड की रिकवरी के साथ प्राय: यह समस्या भी दूर हो जाती है।
क्या नहीं करना चाहिए?
आमतौर पर देखने को मिलता है कि ऐसी स्थितियों में जिन लोगों को पहले से हृदय की कोई दिक्कत है, वह उस रोगी को अपना उपचार बताने लगते हैं। लेकिन यहां सावधान रहने की जरूरत है, हर किसी की दिक्कतें और उसका इलाज अलग होता है। कोविड के जिन रोगियों को हृदय संबंधी दिक्कतें हो रही हों उन्हें बिना किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह के, किसी भी दवा को प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेदांता इंदौर में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अल्केश जैन से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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