ब्रेन स्ट्रोक में समय पर इलाज जरूरी
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क्या है पूरा मामला?
ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया में प्रकाशित में 33 साल की बेक्की बराट का जिक्र मिलता है।
इसी साल अप्रैल में एक रविवार की सुबह बेक्की बराट अपने सोफे पर बैठी थीं। उनकी गोद में तीन हफ्ते का बेटा ब्यूडेन था और पास ही उनकी दो साल की बेटी अराया खेल रही थी। उस वक्त बेक्की को जिंदगी बेहद खूबसूरत और सुकून भरी लग रही थी।
बेक्की स्वास्थ्य और फिटनेस कोच हैं। कुछ ही देर पहले उन्होंने अपने पति जेम्स से कहा था कि प्रसव को कुछ ही हफ्ते हुए हैं, फिर भी अब वह खुद को बेहद अच्छा महसूस कर रही हैं।लेकिन अगले ही कुछ मिनटों में सबकुछ बदल गया।
33 वर्षीय बेक्की बताती हैं, जेम्स ऊपर टॉयलेट के लिए गए थे। तभी अचानक मेरे शरीर में एक अजीब और भारीपन जैसा एहसास हुआ। बाएं हाथ में अपने आप ऐंठन होने लगी। मैंने किसी तरह ब्यूडेन को फर्श पर सुलाया। लेकिन जैसे ही मैंने खड़े होने की कोशिश की, मेरा बांया पैर पूरी तरह सुन्न हो गया और मैं जमीन पर गिर गई। मैं हिल भी नहीं पा रही थी। मेरी आवाज लड़खड़ा रही थी लेकिन कोशिश करके मैंने जेम्स को आवाज लगाई।
आनन फानन में बेक्की को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि ये स्ट्रोक था। बेक्की कहती हैं, मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये हुआ क्या है? मैं फिटनेस कोच थी, खान-पान अच्छा था, हाई ब्लड प्रेशर भी नहीं था ऐसे में उन्हें स्ट्रोक कैसे हो सकता था?
स्ट्रोक की घटना ने बदल दी जिंदगी
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स्ट्रोक का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार इस्केमिक स्ट्रोक होता है। इसमें खून का थक्का किसी रक्त की नली को रोक देता है और दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है। करीब 85 प्रतिशत स्ट्रोक इसी तरह के होते हैं।
रॉयल डेवॉन यूनिवर्सिटी हेल्थकेयर एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के स्ट्रोक विशेषज्ञ प्रोफेसर मार्टिन जेम्स कहते हैं, ज्यादातर स्ट्रोक 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में होते हैं। लेकिन करीब हर चार में से एक स्ट्रोक कामकाजी उम्र के लोगों, यहां तक कि 35 से कम उम्र वालों में भी हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
घटना के करीब 15 मिनट के भीतर एंबुलेंस से बेक्की को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने तक उनके शरीर का पूरा बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो चुका था।
- बेक्की कहती हैं, मैं शरीर को बिल्कुल भी हिला नहीं पा रही थी। मेरे चेहरे के भाव तक खत्म हो गए थे और मेरी आवाज लड़खड़ाई सी निकल रही थी।
- डॉक्टरों ने तुरंत सीटी स्कैन किया। इसमें दिमाग में ब्लीडिंग का कोई संकेत नहीं मिला। ब्लीडिंग वाले स्ट्रोक को हेमरेजिक स्ट्रोक कहा जाता है।
बेक्की बताती हैं, मुझे पहले कभी-कभी माइग्रेन की समस्या होती थी। इसलिए डॉक्टरों को शुरुआत में लगा कि शायद उन्हें हेमिप्लेजिक माइग्रेन हुआ है। यह माइग्रेन का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें दिमाग की असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण शरीर के एक तरफ कुछ समय के लिए कमजोरी या लकवे जैसी स्थिति हो सकती है। इसके लक्षण स्ट्रोक जैसे दिखाई दे सकते हैं।
एमआरआई में स्ट्रोक का पता चला
दो दिन बाद एमआरआई से पुष्टि हो गई कि बेक्की के दिमाग के दाहिने हिस्से तक जाने वाली रक्त आपूर्ति एक थक्के के कारण रुक गई थी। समय पर इलाज शुरू होने से उनकी जान बचाने में मदद मिली, लेकिन दिमाग के की कोशिकाओं को काफी नुकसान पहुंच चुका था। इसी वजह से उनके शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था।
अस्पताल में कुछ दिनों तक रिहैबिलिटेशन और थेरेपी की मदद से शरीर की खोई हुई गतिविधियों को दोबारा हासिल करने में मदद तो मिलने लगी, लेकिन घर लौटते समय वह वह व्हीलचेयर पर थीं और शरीर का बायां हिस्सा अब भी ठीक से काम नहीं कर रहा था।
अब भी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें स्ट्रोक क्यों आया? विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र के मरीजों में स्ट्रोक का सटीक कारण पता न चलना असामान्य नहीं है। बेक्की कहती हैं, मैं यह समझती हूं कि शायद मुझे कभी वह जवाब न मिले जिसकी मैं तलाश कर रही हूं। करीब 50 प्रतिशत स्ट्रोक के पीछे का कारण पता नहीं चल पाता। उन्हें यह भी पता है कि भविष्य में दोबारा स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
गर्भधारण और प्रसव के बाद के जोखिम
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प्रसव के बाद बढ़ जाता है खतरा
बेक्की के हाल ही में मां बनने को भी उनके स्ट्रोक की एक संभावित वजह माना जा रहा है। विरल यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में स्ट्रोक विशेषज्ञ प्रोफेसर डेब लोवे कहते हैं, गर्भावस्था और बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद का समय स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाला माना जाता है।
- गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर पर काफी दबाव होता है।
- इस दौरान हाई ब्लड प्रेशर और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।
- इसी वजह से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का ब्लड प्रेशर नियमित रूप से जांचा जाता है।
2017 में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित करीब 20 लाख महिलाओं पर हुए एक अध्ययन के अनुसार, बच्चे के जन्म के आसपास के दिनों में महिला को स्ट्रोक होने का जोखिम सामान्य समय की तुलना में करीब नौ गुना अधिक हो सकता है। प्रसव के बाद के छह हफ्तों में भी यह जोखिम सामान्य समय की तुलना में करीब तीन गुना अधिक रहता है। अनुमान है कि हर एक लाख गर्भावस्थाओं में करीब 30 स्ट्रोक हो सकते हैं।
जिन महिलाओं को प्री-एक्लेम्पसिया यानी गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या होती है, उनमें खतरा काफी ज्यादा होता है। इस समूह में करीब 500 प्रसव में से एक में स्ट्रोक होने की बात सामने आई है।
ब्रेन स्ट्रोक की घटनाएं
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वोल्फसन सेंटर फॉर द प्रिवेंशन ऑफ स्ट्रोक एंड डिमेंशिया की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लिनशिन ली कहती हैं, कम उम्र में स्ट्रोक बढ़ने के कई संभावित कारणों पर शोध चल रहा है।
- साल 2022 में जामा न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि 55 साल से कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक की घटनाएं 2002-2010 की अवधि की तुलना में 2010-2018 के बीच 67 प्रतिशत बढ़ गईं।
- वहीं बुजुर्गों में स्ट्रोक की दर कम हुई। हाई ब्लड प्रेशर, अधिक वजन और धूम्रपान को इसका बड़ा कारण माना जाता रहा है।
डॉ. लिनशिन ली के शोध में खास तौर पर उन युवा मरीजों में स्ट्रोक बढ़ने की दर अधिक देखी गई, जिनमें ये सामान्य जोखिम कारक मौजूद नहीं थे। इससे लंबे समय तक काम करना, ज्यादा तनाव और वायु प्रदूषण जैसे दूसरे कारणों पर ध्यान गया।
डॉ. ली के कहती हैं, लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा काम करने से दिल की धड़कन की सामान्य लय प्रभावित हो सकती है और इसके कारण भी स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। वायु प्रदूषण भी स्ट्रोक के संभावित कारणों में शामिल माना जा रहा है। प्रदूषित हवा शरीर में सूजन बढ़ा सकती है और इससे खून में थक्का बनने का खतरा बढ़ सकता है।
स्ट्रोक से बचाव के लिए एक आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाना है।
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स्रोत:
I was breastfeeding my baby — an hour later I was paralysed
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