फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रोस्टेट कैंसर सर्वे: 69% पुरुष नहीं जानते क्यों होती है ये बीमारी, कौन सा टेस्ट कराना है ये भी नहीं पता

Fri, 16 Oct 2026 01:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Prostate Cancer Screening: एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि 45 साल से अधिक उम्र के कई भारतीय पुरुष प्रोस्टेट कैंसर की जांच, जोखिम और इलाज से अनजान हैं। डॉक्टरों से चर्चा करने में झिझक भी बड़ी बाधा है। इस कैंसर से सालाना लाखों लोगों की मौत हो रही है।
विज्ञापन
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कैंसर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। हर साल कैंसर से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर जबकि पुरुषों में फेफड़े-मुंह और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले प्रमुख कैंसर में से एक है, लेकिन भारत में इसे लेकर जागरूकता की कमी चिंता बढ़ा रही है।

विज्ञापन


स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, समय रहते प्रोस्टेट कैंसर की जांच हो जाए तो बीमारी के बढ़ने और इसके गंभीर रूप लेने के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। हालांकि भारत को लेकर हैरानी की बात यह है कि यहां 45 साल से अधिक उम्र के 10 में से करीब 6 पुरुषों को यह भी नहीं पता कि उन्होंने कभी प्रोस्टेट कैंसर की जांच कराई है या नहीं?

एक सर्वे में सामने आया है कि करीब 69 फीसदी पुरुष इस बीमारी का एक भी जोखिम कारक नहीं जानते हैं। वहीं, ज्यादातर पुरुषों को शुरुआती जांच में इस्तेमाल होने वाले पीएसए ब्लड टेस्ट के बारे में भी जानकारी नहीं थी। समस्या सिर्फ जानकारी की कमी तक सीमित नहीं है। कई पुरुष डॉक्टर से प्रोस्टेट की सेहत पर बात करने में भी झिझकते हैं और पेशाब से जुड़ी समस्याओं को बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

विज्ञापन
Trending Videos

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

हील फाउंडेशन की ओर से किए गए एक हालिया सर्वे में पता चला है कि भारत में 45 साल और इससे अधिक उम्र के 84 फीसदी पुरुष ऐसे हैं, जिन्होंने या तो कभी प्रोस्टेट कैंसर की जांच नहीं कराई या उन्हें अपनी जांच की स्थिति के बारे में जानकारी ही नहीं है। कई पुरुषों ने सर्वे में बताया कि वे मानते हैं कि उन्हें इस जांच की जरूरत ही नहीं है।

दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुल 1,036 पुरुषों को इस सर्वे में शामिल किया गया था। इसमें प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम, इसकी जांच और इलाज के विकल्पों को लेकर जागरूकता की कमी सामने आई। सर्वे में यह भी पता चला कि कई पुरुष डॉक्टरों से प्रोस्टेट की सेहत के बारे में बात करने से हिचकिचाते हैं।
 
  • सर्वे के मुताबिक, 68.9 फीसदी पुरुष प्रोस्टेट कैंसर का एक भी जोखिम कारक नहीं बता सके। 
  • केवल 13.2 फीसदी पुरुषों को पता था कि परिवार में पहले किसी को यह कैंसर होना भी बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है। 
  • करीब 75 फीसदी पुरुषों का मानना था कि प्रोस्टेट कैंसर की निगरानी या इससे जुड़ी जांच 50 साल या उससे अधिक उम्र में ही शुरू होनी चाहिए।

ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. देवव्रत आर्य कहते हैं, ये आंकड़े प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता की बड़ी कमी दिखाते हैं। आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि पुरुषों को नियमित स्वास्थ्य संबंधी सलाह में प्रोस्टेट की सेहत के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए।


(ये भी पढ़िए-  हड्डियों से आगे फैल गया जो बाइडन का प्रोस्टेट कैंसर, जानिए ये कितनी खतरनाक स्थिति)

प्रोस्टेट कैंसर और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
नियमित हेल्थ चेकअप के बावजूद जांच को लेकर जानकारी की कमी

सर्वे में एक और अहम बात सामने आई। करीब दो-तिहाई पुरुषों ने बताया कि वे हर साल सामान्य हेल्थ चेकअप तो कराते हैं। इसके बावजूद प्रोस्टेट कैंसर की जांच को लेकर जानकारी की कमी बनी हुई है।
 
  • करीब 60.8 फीसदी पुरुषों को पता नहीं था कि उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर की जांच कराई है या नहीं।
  • वहीं, केवल छह में से लगभग एक पुरुष ने बताया कि उसने कभी यह जांच कराई थी।

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती जांच में इस्तेमाल होने वाले पीएसए (पीएसए) ब्लड टेस्ट के बारे में भी जानकारी कम थी। केवल 31 फीसदी पुरुषों ने इस जांच का नाम सुना था।
 
  • पीएसए यानी प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन एक ऐसा प्रोटीन है, जिसका स्तर खून की जांच से मापा जाता है। इसका स्तर बढ़ा हुआ मिलने पर प्रोस्टेट में कैंसर के अलावा दूसरी समस्याओं की आशंका भी हो सकती है। 
विज्ञापन

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe stock
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. नितेश रोहतगी कहते हैं, ये सर्वे एक चिंताजनक स्थिति को दिखाता है। पुरुष सामान्य हेल्थ चेकअप तो करा रहे हैं, लेकिन प्रोस्टेट की सेहत पर नियमित रूप से चर्चा नहीं हो रही है।
 
  • 84 फीसदी पुरुषों का जांच नहीं कराना, अपनी स्थिति को लेकर अनिश्चित होना या जांच को गैर-जरूरी समझना बताता है कि अभी जागरूकता बढ़ाने के लिए काफी काम करने की जरूरत है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि बुजुर्ग मरीजों और उनका देखभाल करने वाले परिवार के लोगों को प्रोस्टेट कैंसर के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती। कई बार इसके लक्षणों को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे बीमारी का पता चलने में देरी हो सकती है।

डॉक्टर से प्रोस्टेट की सेहत पर बात करने में झिझक

सर्वे में पुरुषों के बीच एक और बड़ी समस्या सामने आई। करीब 59.5 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वे डॉक्टर से प्रोस्टेट कैंसर की जांच या इलाज के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं। वहीं, केवल 18 फीसदी पुरुषों ने बताया कि वे खुद आगे बढ़कर डॉक्टर से इस विषय पर बातचीत शुरू करेंगे।

इसके उलट, 84 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए इंटरनेट पर खोज करते हैं। करीब 48 फीसदी पुरुषों ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर के बारे में डॉक्टर से पहली बार बातचीत करने का फैसला लेने में परिवार या दोस्तों की भूमिका रही।

इससे पता चलता है कि ऑनलाइन जानकारी और परिवार की सलाह का असर तो है, लेकिन डॉक्टर से सीधे बात करने को लेकर अब भी झिझक बनी हुई है।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें