भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले काफी ज्यादा मिलते हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि किन महिलाओं को स्तर कैंसर की जांच करानी चाहिए।
महिलाओं में स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग करने के लिए महिलाओं द्वारा खुद के स्तन की जांच, डॉक्टर द्वारा स्तन की जांच और मैमोग्राम (स्तन का एक्स रे) का उपयोग किया जाता है। यह स्क्रीनिंग उन महिलाओं में की जाती है, जिन्हें स्तन कैंसर के कोई लक्षण ना हो ताकि हमें कैंसर के बारे में शुरूआती स्टेज में पता चल जाए। डेंस स्तन वाले मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। साथ ही एमआरआई का उपयोग उन महिलाओं में किया जाता है जिनमें स्तन कैंसर का जोखिम ज्यादा है। यह प्रारंभिक उपचार की अनुमति देता है जो बीमारी के कारण होने वाली पीड़ा और मरने की संभावना को कम करता है।
हर एक महिला को प्रत्येक वर्ष स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग करानी चाहिए। औसतन जोखिम वाली महिलाओं को 40 साल की उम्र में स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए और 70 साल की उम्र तक इसे जारी रखना चाहिए। उसके बाद ये ऑप्शनल हो जाता है। महिलाओं में स्तन कैंसर के अधिक जोखिम को देखते हुए उनकी स्क्रीनिंग करने की उम्र अलग-अलग होती है। डॉक्टर एक फॉर्मूले का उपयोग करके महिलाओं में स्तन कैंसर के जोखिम का आकलन करते हैं जिसमें इनके बारे में जानकारी शामिल है जैसे: उस महिला की वर्तमान उम्र, वह उम्र जब उसके पीरियड्स शुरू हुए थे, जिस उम्र में उन्होने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था या फिर उनका बच्चा नहीं है,करीबी रिश्तेदारों में स्तन कैंसर की मौजूदगी, पिछली बार हुए स्तन बायोप्सी में सौम्य (Benign) स्तन रोग या एटिपिकल हाइपरप्लासिया (जोकि एक प्रकार की खोज है जब हम माइक्रोस्कोप के तहत ट्यूमर कोशिकाओं को देखते हैं) और वह महिला किस प्रकार की विशेष आबादी से संबंधित है।