प्रतीकात्मक तस्वीर
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इकोसिस्टम की धुरी हैं वायरस
हमारे लिए वो वायरस सबसे महत्वपूर्ण हैं, जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। इन्हें फेगस कहते हैं. जिसका अर्थ है निगल जाने वाले। टोनी गोल्डबर्ग कहते हैं कि समंदर में बैक्टीरिया की आबादी नियंत्रित करने में फेगस विषाणुओं का बेहद अहम रोल है। अगर ये वायरस खत्म हो जाते हैं, तो अचानक से समुद्र का संतुलन बिगड़ जाएगा।
समुद्र में 90 फीसदी जीव, माइक्रोब यानी छोटे एक कोशिकाओं वाले जीव हैं। ये धरती की आधी ऑक्सीजन बनाते हैं और ये काम वायरस के बिना नहीं हो सकता। समंदर में पाए जाने वाले वायरस वहां के आधे बैक्टीरिया और 20 प्रतिशत माइक्रोब्स को हर रोज मार देते हैं।
इससे समुद्र में मौजूद काई, शैवाल और दूसरी वनस्पतियों को खुराक मिलती है, जिससे वो फोटो सिंथेसिस करके, सूरज की रौशनी की मदद से ऑक्सीजन बनाते हैं और इसी ऑक्सीजन से धरती पर जिंदगी चलती है। अगर वायरस खत्म हो जाएंगे, तो समुद्र में इतनी ऑक्सीजन नहीं बन पाएगी। फिर पृथ्वी पर जीवन नहीं चल सकेगा। कर्टिस सटल कहते हैं कि, 'अगर मौत न हो, तो जिंदगी मुमकिन नहीं, क्योंकि जिंदगी, धरती पर मौजूद तत्वों की रिसाइकिलिंग पर निर्भर करती है और इस रिसाइकिलिंग को वायरस करते हैं।'