गंगा के जल में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर अलर्ट
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गंगा के जल में बढ़ रहा है फेकल कोलीफॉर्म
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सूचित किया है कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में विभिन्न स्थानों पर फेकल कोलीफॉर्म का स्तर बढ़ गया है। ये जल स्नान के लिए अनुरूप नहीं है।
गौरतलब है कि पानी की गुणवत्ता के आकलन के लिए फेकल कोलीफॉर्म का परीक्षण किया जाता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि पानी पीने, तैरने या अन्य गतिविधियों के लिए सुरक्षित है या नहीं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यहां से संभावित रूप से जलजनित बीमारियों के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।
फेफड़ों में संक्रमण का हो सकता है खतरा
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फेकल कोलीफॉर्म के कारण हो सकती हैं कई बीमारियां
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि फेकल कोलीफॉर्म से दूषित पानी में नहाने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ये गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण जैसे दस्त, उल्टी और पेट में ऐंठन की दिक्कतों को बढ़ा सकता है। इतना ही नहीं दूषित जल के संपर्क के कारण त्वचा और आंखों में संक्रमण का भी खतरा रहता है।
दूषित जल के कारण चकत्ते, आंखों में जलन और फंगल इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है उनमें फेफड़ों में संक्रमण का भी जोखिम हो सकता है, जिसको लेकर संगम जाने वाले सभी लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।
नियमित जांच (सांकेतिक)
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कुंभ से लौटे साधुओं में देखी जा रही एलर्जी की दिक्कत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, तीर्थयात्रियों के लिए तत्काल जोखिम के अलावा, यह प्रदूषण स्थानीय लोगों के लिए भी एक बड़ा खतरा है जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए गंगा पर निर्भर हैं। पानी में बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है, जिसको ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को पीने के पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते रहने की जरूरत है। इधर प्रयागराज महाकुंभ से बनारस लौटे बड़े संख्या में नागा साधुओं में एलर्जी की समस्या देखी जा रही है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर विजय नाथ मिश्र ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि 'घाट वॉक ओपीडी' के तहत किए जा रहे नियमित टेस्ट के दौरान पाया गया है कि कुंभ से लौटे कई साधु सर्दी-जुकाम और एलर्जी से परेशान हैं। कुंभ की धूल के कारण कई साधुओं में इंफेक्शन का जोखिम भी देखा गया है। डॉक्टर मिश्र ने बताया कि साधुओं को दवाइयां और उचित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिन लोगों को पहले से कोई श्वसन समस्या या एलर्जी की दिक्कत रही है उन्हें संगम में स्नान या वहां रहने के दौरान सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
इसके अलावा वाराणसी के घाटों पर जीन वैज्ञानिक कुंभ से लौटे साधुओं के एंटीबॉडी भी टेस्ट कर रहे हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में जीन वैज्ञानिक डॉ ज्ञानेश्वर चौबे और उनकी टीम जेनेटिक्स टेस्ट के लिए सैंपल इकट्ठा कर रही है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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