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Mahakumbh: फेकल कोलीफॉर्म से दूषित हो रही है गंगा, कुंभ से लौट रहे लोग हो रहे बीमार? जानिए इसके दुष्प्रभाव

Wed, 19 Feb 2025 03:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में पानी में फैली गंदगी को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा और यमुना का जल फिलहाल नहाने के लायक नहीं है।
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महाकुंभ स्नान 2025 - फोटो : PTI
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विस्तार
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प्रयागराज में जारी महाकुंभ इन दिनों दुनियाभर के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भारत ही नहीं, विश्व के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक के आंकड़ों के अनुसार 56 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। हालांकि यहां इकट्ठा होती भीड़ और रोज करोड़ों लोगों के संगम में डुबकी लगाने के कारण जल प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में पानी में बढ़ रही गंदगी को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा और यमुना का जल फिलहाल नहाने के लायक नहीं है।

दूषित हो रहा है गंगा का जल

सीपीसीबी ने एक रिपोर्ट में बताया कि संगम समेत कई जगहों पर फेकल कोलीफॉर्म (खतरनाक बैक्टीरिया) बढ़ गया है। इसका स्तर 2,500 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर की तय सीमा से बहुत ज्यादा हो गया है, जिससे गंभीर प्रदूषण का संकेत मिलता है। चूंकि अभी भी रोजाना बड़ी संख्या में यहां लोग स्नान कर रहे हैं इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ने और इसके कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने का जोखिम हो सकता है।

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गंगा के जल में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर अलर्ट - फोटो : अमर उजाला
गंगा के जल में बढ़ रहा है फेकल कोलीफॉर्म

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सूचित किया है कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में विभिन्न स्थानों पर फेकल कोलीफॉर्म का स्तर बढ़ गया है। ये जल स्नान के लिए अनुरूप नहीं है।

गौरतलब है कि पानी की गुणवत्ता के आकलन के लिए फेकल कोलीफॉर्म का परीक्षण किया जाता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि पानी पीने, तैरने या अन्य गतिविधियों के लिए सुरक्षित है या नहीं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यहां से संभावित रूप से जलजनित बीमारियों के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। 


फेफड़ों में संक्रमण का हो सकता है खतरा - फोटो : Freepik.com
फेकल कोलीफॉर्म के कारण हो सकती हैं कई बीमारियां

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि फेकल कोलीफॉर्म से दूषित पानी में नहाने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ये गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण जैसे दस्त, उल्टी और पेट में ऐंठन की दिक्कतों को बढ़ा सकता है। इतना ही नहीं दूषित जल के संपर्क के कारण  त्वचा और आंखों में संक्रमण का भी खतरा रहता है।

दूषित जल के कारण चकत्ते, आंखों में जलन और फंगल इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है उनमें फेफड़ों में संक्रमण का भी जोखिम हो सकता है, जिसको लेकर संगम जाने वाले सभी लोगों को अलर्ट किया जा रहा है। 
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नियमित जांच (सांकेतिक) - फोटो : freepik.com
कुंभ से लौटे साधुओं में देखी जा रही एलर्जी की दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, तीर्थयात्रियों के लिए तत्काल जोखिम के अलावा, यह प्रदूषण स्थानीय लोगों के लिए भी एक बड़ा खतरा है जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए गंगा पर निर्भर हैं। पानी में बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है, जिसको ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को पीने के पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते रहने की जरूरत है। इधर प्रयागराज महाकुंभ से बनारस लौटे बड़े संख्या में नागा साधुओं में एलर्जी की समस्या देखी जा रही है। 


क्या कहते हैं डॉक्टर?

बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर विजय नाथ मिश्र ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि 'घाट वॉक ओपीडी' के तहत किए जा रहे नियमित टेस्ट के दौरान पाया गया है कि कुंभ से लौटे कई साधु सर्दी-जुकाम और एलर्जी से परेशान हैं। कुंभ की धूल के कारण कई साधुओं में इंफेक्शन का जोखिम भी देखा गया है। डॉक्टर मिश्र ने बताया कि साधुओं को दवाइयां और उचित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिन लोगों को पहले से कोई श्वसन समस्या या एलर्जी की दिक्कत रही है उन्हें संगम में स्नान या वहां रहने के दौरान सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

इसके अलावा वाराणसी के घाटों पर जीन वैज्ञानिक कुंभ से लौटे साधुओं के एंटीबॉडी भी टेस्ट कर रहे हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में जीन वैज्ञानिक डॉ ज्ञानेश्वर चौबे और उनकी टीम जेनेटिक्स टेस्ट के लिए सैंपल इकट्ठा कर रही है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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