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बड़ी राहत: दिल के मरीजों के लिए गुड न्यूज, हार्ट की जानलेवा समस्या का अब पहले ही चल जाएगा पता

Wed, 30 Sep 2026 12:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल की मांसपेशियों में छिपी सूजन यानी कार्डियक सारकॉइडोसिस शुरुआत में बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती है। एम्स के अध्ययन में उन्नत कार्डियक एमआरआई से दिल के सूक्ष्म बदलावों की पहचान के संकेत मिले है। समय पर बीमारी की पता चलने से गंभीर खतरों को कम किया जा सकेगा।
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दिल की बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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दिल की बीमारी का मतलब हमेशा सिर्फ ब्लॉकेज या हार्ट अटैक ही नहीं होता। कई बार दिल की मांसपेशियों के अंदर ऐसी सूजन शुरू हो सकती है, जिसका शुरुआती दौर में बाहर से कोई साफ संकेत नहीं मिलता। समस्या यह है कि जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं, तब तक दिल के कामकाज पर असर पड़ना शुरू हो सकता है। इसी छिपी हुई समस्या को समय रहते पकड़ने की दिशा में एम्स के एक अध्ययन ने नई उम्मीद जगाई है।

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इस अध्ययन में उन्नत कार्डियक एमआरआई की मदद से दिल की मांसपेशियों में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों को भी पहचानने की कोशिश की गई। खास बात यह है कि इस अध्ययन में ऐसे मरीजों में भी असामान्यता के संकेत मिले, जिनकी दूसरी जांच में सबकुछ ठीक था और बदलाव साफ नहीं थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संदिग्ध मरीजों में बीमारी को समझने और उसकी सक्रियता का आकलन करने के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।

कार्डियक सारकॉइडोसिस जैसी बीमारी में दिल की मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में दिल की धड़कनों के तेज या अनियमित होने, सांस फूलने और आगे चलकर दिल की पंपिंग क्षमता कम होना जैसी समस्याओं का खतरा देखा जाता रहा है।

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हृदय रोगों का पता लगाना होगा आसान - फोटो : Adobe Stock Images
एम्स दिल्ली के कार्डियोवास्कुलर रेडियोलॉजी एंड एंडोवास्कुलर इंटरवेंशंस, कार्डियोलॉजी और जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग ने संयुक्त अध्ययन ने दिल के मरीजों को बड़ी राहत दी है।  हृदय की मांसपेशियों में छिपी सूजन (कार्डियक सारकॉइडोसिस) से पीड़ित मरीजों को इससे सीधा लाभ मिल सकता है। अब आसानी से दिल की सूजन और शुरुआती क्षति का पता लगाया जा सकेगा। यह सब होगा उन्नत कार्डियक एमआरआई तकनीक से।

विशेषज्ञ कहते हैं, इससे बीमारी के कारण हृदय को होने वाले नुकसान का आकलन करने, मरीजों की निगरानी और भविष्य में होने वाले जोखिमों को समझने में मदद मिल सकती है। 


हृदय की मांसपेशियों पर बीमारी के प्रभाव को समझना होगा आसान

यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग में प्रकाशित हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार, हृदय की मांसपेशियों में होने वाले बदलावों की पहचान में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। एम्स के कार्डियोवास्कुलर रेडियोलॉजी एंड एंडोवास्कुलर इंटरवेंशंस विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमरिंदर सिंह मल्ही ने बताया कि कार्डियक एमआरआई में टी-1 मैपिंग, टी-2 मैपिंग और लेट गैडोलिनियम एन्हांसमेंट (एलजीई) को शामिल करने से हृदय की मांसपेशियों पर बीमारी के प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकता है।
 
  • टी-1 मैपिंग एक एडवांस्ड कार्डिएक मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग तकनीक है, जिसका उपयोग हृदय की मांसपेशियों (मायोकार्डियम) के ऊतकों के स्वास्थ्य और उनमें होने वाले सूक्ष्म बदलावों को मापने के लिए किया जाता है।
  • टी-2 मैपिंग  एक आधुनिक और क्वांटेटिव एमआरआई तकनीक है, जिसका उपयोग ऊतकों के भीतर पानी की मात्रा और आणविक गतिशीलता का सटीक आकलन करने के लिए किया जाता है।
  • लेट गैडोलिनियम एन्हांसमेंट कार्डियक एमआरआई  में इस्तेमाल की जाने वाली एक विशेष इमेजिंग तकनीक है। इसका मुख्य उद्देश्य दिल की मांसपेशियों में स्कार, फाइब्रोसिस, या मृत ऊतकों का पता लगाना है।

धड़कनों में अनियमितता की समस्या - फोटो : Freepik.com
68 फीसदी मरीजों को थी धड़कन तेज होने की शिकायत

अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत उम्र 38 वर्ष थी। 68.4 फीसदी मरीजों को दिल की धड़कन तेज या अनियमित होने की समस्या थी, जबकि 52.63 फीसदी मरीजों को सांस फूलने की शिकायत थी।
 
  • एमआरआई जांच में 63.15 फीसदी मरीजों में एलजीई के संकेत मिले। इनमें बीमारी का असर मुख्य रूप से हृदय की मांसपेशियों के बीच वाले हिस्से और बाहरी परत के पास देखा गया।
  • टी-1 मैपिंग में 1,029 मिलीसेकंड के कटऑफ पर प्रभावित हिस्सों की पहचान की संवेदनशीलता 87.5 फीसदी और विशिष्टता 96.9 फीसदी रही।
  • वहीं, एलजीई में सामान्य दिखने वाले सात मरीजों में टी-1 मैपिंग ने हृदय के 112 हिस्सों में से 38 में असामान्यता के संकेत दिए। इन सभी मरीजों में कम से कम एक प्रभावित हिस्सा मिला। पीईटी जांच कराने वाले दोनों मरीजों में हृदय की सक्रिय सूजन की पुष्टि हुई।
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दिल की बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
एमआरआई से बीमारी की सक्रियता का आकलन

अध्ययन में एमआरआई और पीईटी-सीटी दोनों जांच कराने वाले दस मरीजों में एमआरआई ने पांच और पीईटी ने आठ मरीजों में सक्रिय बीमारी का पता लगाया। हालांकि, दोनों जांचों के परिणामों में अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं पाया गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, संदिग्ध कार्डियक सारकॉइडोसिस में टी-1, टी-2 मैपिंग और एलजीई का संयोजन हृदय की भागीदारी का पता लगाने में उपयोगी हो सकता है। 

कार्डियक सारकॉइडोसिस के लक्षण

डॉ. मल्ही के अनुसार, सारकॉइडोसिस सूजन संबंधी बीमारी है, जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। हृदय में इसका असर गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। शुरुआती चरण में कई मरीजों में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। बीमारी बढ़ने पर धड़कन अनियमित होने, हृदय की विद्युत गतिविधि में गड़बड़ी, पंपिंग क्षमता कम होने और हार्ट फेल्योर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में अचानक हृदय संबंधी मृत्यु का जोखिम भी रहता है।




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स्रोत:
Role of Cardiac Magnetic Resonance Imaging-Derived Tissue Characterization in Cardiac Sarcoidosis: Experience from a Tertiary Referral Center of India


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