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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: डॉक्टरों ने बताया, कोरोना की पहली और दूसरी लहर में यह रहा है खास अंतर

Sun, 09 May 2021 09:12 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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जानें दूसरी लहर को क्यों ज्यादा खतरनाक मान रहे हैं विशेषज्ञ - फोटो : pixabay
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कोरोना वायरस का संक्रमण पूरे देश को अपनी चपेट में ले चुका है। पिछले चार दिनों से हर रोज संक्रमितों के रोज का आंकडा चार लाख को पार कर रहा है। कई राज्यों ने संक्रमण की रफ्तार पर काबू पाने के लिए लॉकडाउन का भी ऐलान कर दिया है। आलम यह है कि एक साल पहले की तरह ही लोग एक बार फिर से घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए हैं। चूंकि इस बार संक्रमण की रफ्तार और इससे मरने वालों की संख्या अधिक है, ऐसे में कोरोना की दूसरी लहर लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह से प्रभावित कर रही है। ऐसे समय में सभी के मन में बस एक ही सवाल है कि आखिर यह महामारी कब खत्म होगी?
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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर रविवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों ने इसी विषय के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन और आईआईपीएच गांधीनगर में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक सक्सेना ने सभी सवालों के जवाब दिए।

क्या कहते हैं महामारी विशेषज्ञ?
डॉ दीपक सक्सेना कहते हैं कि आंकड़े बताते हैं कि देश के 180 जिलों में पिछले एक हफ्ते में एक भी मामले नहीं आए हैं। कई राज्यों में भी कोरोना के मामलों में गिरावट देखने को मिली है। फिलहाल हमारे लिए यह आंकड़े सुकून देने वाले हैं। देश में वैक्सीनेशन का भी प्रभाव दिखना शुरू हो गया है, ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि मई के मध्य से देश में कोरोना के मामले कम होने लगेंगे।
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दूसरी लहर में युवा हो रहे हैं ज्यादा संक्रमित - फोटो : iStock
क्या दूसरी लहर का पीक आ चुका है?
इस सवाल के जवाब में डॉ सक्सेना कहते हैं कि हमें हर राज्य और उसके शहरों के हिसाब से पीक को देखना चाहिए। कुछ शहरों में पीक पहले ही आ चुका है, अब वहां स्थिति सुधर रही है और कोरोना के मामलों में भी कमी देखी जा रही है। अहमदाबाद, सूरत, इंदौर, नासिक जैसे शहरों में पीक पहले ही आ चुका है। जबकि कुछ शहरों में मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं, उम्मीद की जा रही है कि मई के अंत तक वहां भी हालत सुधर जाएंगे।

पहली और दूसरी लहर में क्या अंतर रहा?
इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन कहते हैं कि पहली लहर को ट्रायल के रूप में देखा जा सकता है जबकि लहर में मुश्किलें ज्यादा देखने को मिली हैं।
पहली लहर में वह लोग ज्यादा प्रभावित हुए थे जिनको पहले से कोई गंभीर समस्या थी, उसमें भी गंभीर मामले काफी कम थे। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में वायरस युवाओं को ज्यादा प्रभावित कर रहा है, इतना ही नहीं गंभीर रोगियों की संख्या में भी इस बार ज्यादा इजाफा देखने को मिला है, जोकि चिंताजनक है। 

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नोट: यह लेख दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन और आईआईपीएच गांधीनगर में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक सक्सेना से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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