बच्चे का कोरोना टेस्ट करती महिला स्वास्थ्यकर्मी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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दरअसल, 'नेजोफेरेंजियल स्वॉब' कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए नाक की पिछली दीवार के नमूने लेता है। ये कई स्वॉब सैंपल तकनीकों में से एक है। ब्रिटेन समेत कई देशों में कोविड-19 की जांच करने के लिए नाक और गले का स्वॉब सैंपल नियमित रूप से लिया जा रहा है। लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन से जुड़े टॉम विंगफील्ड कहते हैं, 'मैंने अस्पताल में काम करते हुए कई मरीजों का स्वॉब सैंपल लिया है और हर हफ्ते एक ट्रायल के लिए अपना स्वॉब सैंपल भी लेता हूं। नाक में किसी भी चीज का इतना अंदर जाना थोड़ा अजीब है। स्वॉब सैंपल लिए जाते समय थोड़ी खुजली या गुदगुदाहट हो सकती है लेकिन दर्द नहीं होना चाहिए।'
ये झूठे दावे बीती छह जुलाई को कुछ अमेरिकी फेसबुक अकाउंट्स से शुरू हुए थे। कुछ दावों में इस बात का भी जिक्र है टेस्टिंग से इनकार करने से जुड़े कई कॉल भी आ रहे हैं। इनमें से कुछ दावों को फैक्ट चेक करने वाली संस्थाओं ने झूठा बताया है। ये भी देखा गया कि कि यही ग्राफिक रोमेनियन, फ्रेंच, डच और पुर्तगाली फेसबुक यूजर्स के अकाउंट पर भी शेयर हो रहे हैं।