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कोरोना वायरस फेफड़ों को कैसे और कितना पहुंचाता है नुकसान? सिगरेट पीने वाले हो जाएं सावधान

Sat, 12 Sep 2020 05:13 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक इस वायरस से दो करोड़ 86 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि नौ लाख 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अगर भारत की बात करें तो यहां पिछले 24 घंटों में 97 हजार से अधिक संक्रमण के मामले सामने आए हैं। अब यहां संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 46 लाख 59 हजार से अधिक हो गई है। हालांकि राहत की बात ये है कि इस बीमारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। यहां अब तक 36 लाख 24 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं। इस वायरस के संक्रमण को लेकर लगातार रिसर्च चल रही है कि यह किस हद तक शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है या पहुंचा रहा है। हाल ही में किए गए एक शोध में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आइए जानते हैं इसके बारे में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर एक बार कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो वह उसे काफी नुकसान पहुंचाता है। वैसे तो यह पहले से सिद्ध हो चुका है कि सिगरेट पीने से फेफड़ों को क्षति पहुंचती है, लेकिन अब ताजा शोध में यह खुलासा हुआ है कि किसी व्यक्ति के फेफड़ों को लगातार 25 साल तक धूम्रपान करने यानी सिगरेट पीने से जितना नुकसान नहीं होता, उतना तो कोरोना वायरस महज एक महीने में नुकसान पहुंचा सकता है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कोरोना के संक्रमण से एक बार ठीक होने के बाद सबकुछ ठीक हो गया, जबकि ऐसा नहीं है। ठीक हुए लोगों के फेफड़ों को कोरोना वायरस के कारण स्थायी क्षति भी पहुंच सकती है। यह धूम्रपान करने वााले लोगों के लिए और भी जानलेवा साबित हो सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कई रिपोर्ट्स में ऐसा खुलासा हुआ है कि कोरोना वायरस के हमले के कारण ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित हो जाता है और फेफड़ों में सफेद दाग पड़ जाते हैं। सांस लेने में कठिनाई की वजह से कई लोगों को अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ रहा है। अब तक हुए रिसर्च से यह बात तो साबित नहीं हुई है कि कोरोना से ठीक होने के बाद क्षतिग्रस्त फेफड़ों की हालत कब तक ठीक हो पाती है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इसमें छह महीने भी लग सकते हैं और एक साल भी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सांस लेने में क्यों होती है दिक्कत? 

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोरोना वायरस इंसान के फेफड़ों तक पहुंचता है तो वह फेफड़ों को छोटे-छोटे एयरसैक यानी वायुकोष बना देता है। इन्हीं वायुकोष में जब पानी जमने लगता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है, इंसान लंबी सांस नहीं ले पाता। इस स्थिति में मरीज को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इम्यून सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाता है कोरोना 

कोरोना वायरस बीमारियों से लड़ने में मदद करने वाले इम्यून सिस्टम को भी भारी नुकसान पहुंचाता है। गंभीर मरीजों में इम्यून सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। सिर्फ यही नहीं, कोरोना वायरस के कारण व्यक्ति को दौरे भी पड़ सकते हैं और वो कोमा में जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क को भी करता है प्रभावित 

कोरोना वायरस इंसान के मस्तिष्क को भी बुरी तरह प्रभावित करता है, जिससे ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर मरीजों में इसके कारण ब्रेन में सूजन आ जाती है, जो खतरनाक स्तर पर पहुंचने पर संक्रमित व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। 
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