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Coronavirus: कोरोना वायरस किनके लिए सबसे ज्यादा खतरनाक? जानिए ऐसे ही 11 जरूरी सवालों के जवाब

Mon, 24 Aug 2020 01:11 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दुनियाभर के 188 से भी ज्यादा देशों में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इसकी चपेट में आए लोगों की संख्या दो करोड़ 32 लाख से ज्यादा हो चुकी है जबकि अब तक इस महामारी से आठ लाख पांच हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक महामारी घोषित किया है। 

कोरोना के संक्रमण और उसके लक्षण सामने आने में कितना समय लगता है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद इसके लक्षण सामने आने में पांच दिनों का समय लगता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण दिखने में इससे ज्यादा वक्त भी लग सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के लक्षण 14 दिनों तक रहते हैं, लेकिन कुछ शोधकर्ताओं की राय में इसके लक्षण 24 दिनों तक रह सकते हैं। इनक्यूबेशन पीरियड या बीमारी के सामने आने में लगने वाले समय को जानना और समझना जरूरी है। इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग को ज्यादा बेहतर और प्रभावी तरीके से कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर कदम उठाने में मदद मिलती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना से संक्रमण के बाद ठीक होने वाले लोग दोबारा संक्रमित नहीं होंगे?
  • फिलहाल ये कहना जल्दबाजी होगी। इस वायरस के बारे में अभी दिसंबर में ही पता चला है। वायरस संक्रमण के दूसरे मामलों से जुड़े अतीत के अनुभव बताते हैं कि रोग रोग प्रतिरोधकों के जरिये इससे बचाव किया जा सकता है। सार्स और कोरोना परिवार के अन्य विषाणुओं को लेकर हमारी राय ये है कि दोबारा संक्रमित होने के आसार कम हैं, लेकिन चीन से मिलने वाली कुछ रिपोर्टों में ये कहा गया है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी कुछ लोगों के टेस्ट पॉजिटिव पाए गए हैं, पर हम उन टेस्ट को लेकर पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते। हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि ऐसे लोगों से अब संक्रमण का कोई खतरा नहीं था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फ्लू और कोरोना वायरस में क्या अंतर है?
  • कोरोना वायरस और फ्लू (बुखार और संक्रामक जुकाम) के कई लक्षण एक जैसे हैं। बिना मेडिकल टेस्ट के इसके अंतर को समझना मुश्किल है। कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षण बुखार और सर्दी ही है। फ्लू में अक्सर दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं, जैसे- गले में दर्द जबकि कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सांस की तकलीफ की शिकायत रहती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
खुद को एकांत में कैसे रखें?
  • सेल्फ आइसोलेशन यानी खुद को एकांत में रखने का मतलब 14 दिनों तक घर में रहना, काम पर नहीं जाना, स्कूल या किसी अन्य सार्वजनिक जगह पर नहीं जाना और सार्वजनिक परिवहन और टैक्सी से दूर रहना। आपको घर के भीतर भी खुद को परिवार के दूसरे लोगों से अलग रखना चाहिए। अगर आपको घरेलू सामानों की जरूरत हैं या कोई दवा चाहिए या फिर कोई शॉपिंग करनी है तो मदद लें, दरवाजे पर डिलीवरी हो सकती है, लेकिन आप किसी को घर आने के लिए न कहें। आपको अपने पालतू पशुओं से भी दूर रहना चाहिए, लेकिन अगर ये मुमकिन न हो तो उन्हें छूने से पहले और बाद ठीक से हाथ जरूर साफ करें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अस्थमा के मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना खतरनाक?
  • हमारे श्वसन तंत्र या हमारी सांस लेने की प्रणाली में किसी भी तरह का संक्रमण, वो चाहे कोरोना वायरस ही क्यों न हो, अस्थमा की तकलीफ बढ़ा सकता है। कोरोना वायरस को लेकर चिंतित अस्थमा के मरीज कुछ एहतियाती कदम उठा सकते हैं। इसमें डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इनहेलर का इस्तेमाल भी शामिल है। इससे कोरोना सहित किसी वायरस किसी वजह से पड़ने वाले अस्थमा के दौरे का खतरा कम होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या कोरोना का संक्रमण फोन से भी हो सकता है?

माना जाता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण छींकने या खांसने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हो सकता है, लेकिन जानकारों का कहना है कि ये वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी संभवतः कई दिनों तक। इसलिए ये अहम है कि आपका फोन चाहे घर पर हो या दफ्तर में पूरी तरह से बार-बार साफ हो। सभी प्रमुख फोन बनाने वाली कंपनियां मोबाइल फोन को एल्कोहॉल से, हैंड सैनिटाइजर से या स्टरलाइजिंग वाइप्स से साफ करने को लेकर आगाह करती हैं क्योंकि इससे फोन की कोटिंग को नुकसान होने का खतरा रहता है।  

इस कोटिंग लेयर को नुकसान पहुंचने से कीटाणुओं के लिए मोबाइल फोन में फंसे रहना आसान हो जाता है। आजकल जो मोबाइल फोन आते हैं, उनके बारे में कहा जाता है कि वे वाटर रेजिस्टेंस होते हैं यानी पानी से उनको कम खतरा रहता है। अगर ऐसा है तो आप फोन को साबुन और पानी या फिर पेपर टॉवल से साफ कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले ये जरूर जांच लें कि आपका फोन वाटर रेजिस्टेंस है या नहीं।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या कोरोना दरवाजे के हैंडल से भी फैल सकता है?
  • अगर कोई संक्रमित व्यक्ति छींकते वक्त मुंह पर हाथ रखता है और फिर उसी हाथ से वो किसी चीज को छूता है तो वो सतह विषाणुयुक्त हो जाती है। दरवाजे के हैंडल ऐसी सतहों के अच्छे उदाहरण हैं जिससे दूसरे लोगों को संक्रमण का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी कई दिनों तक। इसलिए सबसे अच्छा यही है कि आप हाथ नियमित रूप से धोते रहें ताकि संक्रमण का खतरा कम हो और कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके। 

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स्वीमिंग पूल में तैरना कितना सुरक्षित?
  • ज्यादातर स्वीमिंग पूल्स में क्लोरीन मिलाया जाता है। ये एक ऐसा रसायन है जिससे विषाणु खत्म जाते हैं। इसलिए अगर किसी स्वीमिंग पूल में क्लोरीन का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उसमें तैरना सुरक्षित है। लेकिन इसके बावजूद आप चेंजिंग रूम या फिर किसी संक्रमित सतह जैसे दरवाजे के हैंडल के संपर्क में आने के बाद संक्रमित हो सकते हैं और अगर वहां कोई संक्रमित व्यक्ति आपके नजदीक छींकता या खांसता है तो आपके भी संक्रमित होने का खतरा बना रहेगा। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मास्क पहनना कितना जरूरी?
  • हालांकि डॉक्टर लोग हमेशा ही मास्क पहने हुए दिखते हैं, लेकिन इस बात के प्रमाण कम ही मिलते हैं कि आम लोगों के मास्क पहनने से चीजें बदल जाती हैं। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए वो मास्क पहनने की सिफारिश नहीं करता है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड का कहना है कि अस्पताल के माहौल के बाहर मास्क पहनने से किसी व्यापक फायदे के प्रमाण ज्यादा नहीं मिलते हैं। विशेषज्ञों की राय में साफ-सफाई, जैसे कि- नियमित रूप से हाथ धोना ज्यादा असरदार है। 

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बच्चों के लिए कितना खतरा?
  • चीन से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार, बच्चे तुलनात्मक रूप से कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं। हालांकि जिन बच्चों को फेफड़े की बीमारी है या फिर अस्थमा है, उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि ऐसे मामलों में कोरोना वायरस हमला कर सकता है। ज्यादातर बच्चों के लिए ये श्वसन संबंधी सामान्य संक्रमण की तरह है। इसके बावजूद यह माना जा रहा है कि बच्चों की इम्यूनिटी कम होने से वे कोरोना की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। यही वजह है कि भारत सरकार ने कोरोना संबंधी अपने निर्देशों में दस साल से कम उम्र के बच्चों को घर में रखने का निर्देश जारी किया है। इसके अलावा सभी स्कूल बंद हैं, हालांकि कई स्कूल इस दौरान ऑनलाइन क्लासों को संचालित कर रहे हैं। 
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संक्रमित व्यक्ति के हाथ का बना खाना कितना नुकसानदेह?

संक्रमित व्यक्ति ने खाना बनाते वक्त अगर साफ-सफाई का ठीक से ख्याल न रखा हो तो इससे कोरोना वायरस के फैलने का खतरा रहता है। छींकने या खांसने से हाथ पर लगी कफ के छोटे से हिस्से से भी कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए खाना खाने और छूने से पहले हाथ तरीके से धोये जाएं, इसकी सलाह हमेशा दी जाती है। 
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