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Coronavirus drug: 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' कोरोना वायरस को रोकने में कारगर है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं वैज्ञानिक

Fri, 07 Aug 2020 01:54 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन - फोटो : social media
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा कोविड-19 की बीमारी के रोकथाम में कारगर है या नहीं? इस पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि शायद इस सवाल का जवाब कभी न मिल पाए। वैज्ञानिकों ने इसकी वजह भी बताई है। इस दवा को लेकर चल रहा विवाद और इंटरनेट पर मौजूद भ्रामक जानकारियां इसके ट्रायल को पूरा होने से रोक रही हैं। अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों पर ये दवा बेअसर रही है, लेकिन शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि अगर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की खुराक थोड़ा पहले दी जाए तो ये कारगर हो सकता है। फिलहाल इसके ट्रायल से अस्पतालों ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं। 
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
'जरूरत से ज्यादा राजनीति और नकारात्मक प्रचार'
  • हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में चल रहे ट्रायल में दुनियाभर के 40 हजार फ्रंटलाइन वर्कर्स को शामिल किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि बड़े पैमाने पर की गई स्टडी से ये नतीजे मिल सकते हैं कि कोरोना के इलाज की शुरुआत में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से मरीज की हालत को और बिगड़ने से रोका जा सकता है। 
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Hydroxychloroquine Tablet - फोटो : Social Media
  • रिसर्च टीम से जुड़े प्रोफेसर निक व्हॉइट कहते हैं, 'हम जानते हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज में ये दवा कारगर नहीं, लेकिन ये फिर भी एक दवा है जो कोविड-19 को रोकने में फायदेमंद हो सकती है।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
  • लांसेट मैगजीन में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के नुकसान पर एक रिसर्च पेपर छपने के बाद ब्रिटेन की नियामक एजेंसी एमएचआरए ने इससे जुड़े ट्रायल रोक दिए थे। हालांकि अब उस रिसर्च पेपर को खारिज कर दिया गया है। जून में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर ट्रायल फिर शुरू हुए, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और दवा को लेकर राजनीति के कारण ट्रायल में भाग लेने के लिए लोगों को जुटाने में मुश्किल आ रही है। प्रोफेसर व्हॉइट का कहना है कि कई ट्रस्ट अस्पतालों ने ट्रायल से अपना समर्थन वापस ले लिया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ये क्यों विवादास्पद है?
  • हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल सालों से मलेरिया के इलाज में होता रहा है। फिलहाल इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि ये कोरोना संक्रमण के मामलों में भी कारगर है और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी दी है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के दुरुपयोग से गंभीर नतीजे हो सकते हैं क्योंकि इस दवा के साइड इफेक्ट्स हैं। 
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