सर्वाइकल कैंसर और इसके जोखिम कारक
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कैंसर से बचाव को लेकर बरतें सावधानी
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95% मामले एचपीवी वायरस संक्रमण के कारण
एचपीवी वायरस लगभग 95% सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार है। ये मुख्य रूप से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैलता है, जो कि आमतौर पर यौन क्रियाकलापों के दौरान होता है। असुरक्षित या अप्राकृतिक यौन संबंधों के कारण महिला और पुरुषों दोनों में इस कैंसर का जोखिम देखा जाता रहा है।
रोकथाम को लेकर डब्ल्यूएचओ की रणनीति
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को लेकर डब्ल्यूएचओ ने वैश्विक रणनीति बनाई है जिसके तहत साल साल 2030 तक सभी देशों में 15 साल की उम्र तक 90% लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा 70% महिलाओं की स्क्रीनिंग और सर्वाइकल बीमारी से पीड़ित 90% लोगों का इलाज करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस कैंसर के रोकथाम के लिए तैयार मॉडलिंग से पता चलता है कि अगर इन उपायों का पालन कर लिया जाता है तो साल 2120 तक 62 मिलियन मौतें (6.2 करोड़) और सर्वाइकल कैंसर के कुल 74 मिलियन (7.4 करोड़) नए मामले रोके जा सकेंगे।
कैंसर के जोखिमों के बारे में जानना जरूरी
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65 वर्ष से अधिक उम्र के महिलाओं में बढ़ता खतरा
स्क्रीनिंग कार्यक्रम हर देश में अलग-अलग होते हैं, लेकिन ज्यादातर दिशा-निर्देश 65 साल की उम्र के बाद सर्वाइकल स्क्रीनिंग बंद करने की सलाह देते हैं, अगर पिछले टेस्ट के नतीजे सामान्य रहे हों।
साल 2022 में, दुनियाभर में 65 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं में इस बीमारी से 157,182 नए मामले सामने आए और 124,269 मौतें हुईं।
इस तरह हाल के वर्षों की रिपोर्ट्स के देखते हुए विशेषज्ञों की टीम ने 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में स्क्रीनिंग बढ़ाने की सलाह दी है।
(सेहत पर 'ट्रिपल अटैक', इन कारणों से युवाओं में बढ़ गया है समय से करीब 20 साल पहले मौत का खतरा)
सर्वाइकल कैंसर का बढ़ता खतरा
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
चीन में शोधकर्ताओं ने 2017 से 2023 के बीच 20 लाख से ज्यादा महिलाओं के सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग डेटा का विश्लेषण किया। 20 लाख में से 17,420 केस 65 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं के थे।
निष्कर्षों को लेकर कैंसर रिसर्च यूके में हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजर मैक्सिने लेंजा कहती हैं, 65 वर्ष से ज्यादा उम्र अधिकतर महिलाएं काफी हद तक बिना टीकाकरण वाली आबादी हैं। इनका अगर स्क्रीनिंग न किया जाए तो ऐसे लोगों में सर्वाइकल कैंसर का उच्च जोखिम हो सकता है।
हालिया रिपोर्ट्स बताते हैं कि सिर्फ युवा महिलाओं में ही नहीं, 65 से अधिक उम्र वालों में भी कैंसर होने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग बढ़ाना जरूरी है।
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स्रोत
Global strategy to accelerate the elimination of cervical cancer as a public health problem
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