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Cancer: कैंसर ने बढ़ाया असमय मौत का खतरा, इससे ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को सालाना 1.17 लाख करोड़ का नुकसान

Thu, 03 Jul 2025 07:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कैंसर रिसर्च यूके की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि कैंसर के कारण हर साल समय से पहले मरने वालों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।
  • इसके चलते ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को प्रति वर्ष 10.3 बिलियन पाउंड (1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये) का नुकसान हो रहा है।
  • बिट्रेन में प्रत्येक असमय मृत्यु से अर्थव्यवस्था को औसतन £61,000 (करीब 71 लाख) का नुकसान हो रहा है।
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कैंसर से असमय मौत और इसका अर्थव्यवसाथ पर असर - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार
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दुनियाभर में जिस बीमारी के कारण हर साल सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं, कैंसर उनमें शीर्ष पर है। वैश्विक स्तर पर कैंसर मृत्यु का प्रमुख कारण है, साल 2022 में लगभग 9.7 मिलियन (97 लाख) मौतें कैंसर के कारण हुईं। यह वैश्विक मृत्युदर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इस रोग की गंभीरता को उजागर करता है।

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कैंसर रोग के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर हर साल अतिरिक्त दबाव भी बढ़ता जा रहा है। साल 2022 में लगभग 20 मिलियन (दो करोड़) कैंसर के नए मामले सामने आए, यह संख्या 2050 तक बढ़कर 33 मिलियन (3.3 करोड़) से अधिक होने का अनुमान है। भारत में हर साल 7 लाख से अधिक कैंसर के नए मामले दर्ज किए जाते हैं।

अब खबर ये है कि कैंसर के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव और मृत्यु के मामले तो बढ़ ही रहे हैं, साथ ही इसके कारण हर साल अर्थव्यवस्था पर भी भारी चोट हो रही है। ब्रिटेन की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि कई प्रकार के कैंसर से हर साल समय से पहले मरने वालों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, इसके चलते यहां की अर्थव्यवस्था को प्रति वर्ष 10.3 बिलियन पाउंड (1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये) का नुकसान हो रहा है।

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कैंसर का खतरा और अर्थव्यवस्था पर असर - फोटो : Freepik.com
कैंसर से असमय मौत और इसका अर्थव्यवस्था पर असर

कैंसर रिसर्च यूके की ये रिपोर्ट काफी डराने वाली है, जिसमें कैंसर की गंभीरता और इसके कारण होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों ने कहा, देश में बड़ी संख्या में वयस्क आबादी कैंसर का शिकार हो रही है। ये बीमारी समय से पहले मृत्यु के खतरे को भी बढ़ाती जा रही है, जिसका सीधे तौर पर देश की उत्पादकता और अर्थव्यवस्था पर असर हो रहा है। 

इस शोध के अनुसार, बिट्रेन में प्रत्येक असमय मृत्यु से अर्थव्यवस्था को औसतन £61,000 (करीब 71 लाख) का नुकसान होता है।


(चिंताजनक: सेहत पर 'ट्रिपल अटैक', इन कारणों से युवाओं में बढ़ गया है समय से करीब 20 साल पहले मौत का खतरा)

अर्थव्यवस्था को नुकसान - फोटो : Freepik.com
कैंसर का जीवन के उत्पादक वर्षों पर असर

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि साल 2021 में, कैंसर ने किसी भी अन्य स्थिति की तुलना में जीवन के सबसे अधिक उत्पादक वर्षों का नुकसान किया।

कैंसर रिसर्च यूके के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिशेल मिशेल कहते हैं, कैंसर के कारण रोगियों और उनके प्रियजनों पर होने वाले प्रभावों पर अक्सर चर्चा होती रही है, लेकिन इस रिपोर्ट से पता चलता है कि इसकी एक महत्वपूर्ण आर्थिक कीमत भी है। कैंसर से बचने के तरीकों में सुधार करके, हम अपनी अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

यह निष्कर्ष ऐसे समय में आया है जब इस बात पर भी जोरों से चर्चा चल रही है कि कैसे ब्रिटेन में रिकॉर्ड 2.8 मिलियन लोग इतने बीमार हैं कि वे सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच काम नहीं कर सकते।

कैसे निकाले गए ये परिणाम?

चैरिटी ने व्यक्ति की अपेक्षित आयु से उसकी मृत्यु की आयु घटाकर अपने निष्कर्ष निकाले। फिर उन्होंने उस व्यक्ति की कुल अपेक्षित आय का अनुमान लगाकर और उसमें से कितने वर्षों का नुकसान हुआ, इसे समझने की कोशिश की। इसके आधार पर कैंसर के कारण जीवन के कितने वर्षों पर प्रभाव पड़ा इसके आर्थिक मूल्यों की गणना की।

इन सब के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि हर असमय मृत्यु का उत्पादकता पर सीधा असर होता है जिसके कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। 

कैंसर के कारण असमय मृत्यु का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
कम उम्र में मौत का कारण बनने वाले कैंसर

फेफड़े के कैंसर से होने वाली मौतों से यू.के. को सबसे अधिक नुकसान होता है ये आंकड़ा £1.7 बिलियन (20 हजार करोड़ रुपये) है। वहीं आंत के कैंसर से होने वाली मौतों से £1.2 बिलियन (करीब 14  जबकि स्तन कैंसर से होने वाली मौतों से £800 मिलियन का नुकसान होता है।

ये वो तीन कैंसर हैं जो कम उम्र में सबसे अधिक मौतों का कारण बनते हैं, साथ ही इसके कारण जीवन के सबसे अधिक उत्पादक वर्ष भी नष्ट हो जाते हैं जिसका असर सीधे अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।

विशेषज्ञों ने बताया कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में समय से पहले मृत्यु का खतरा भी अधिक रहता है, इसके अलावा पुरुष औसतन महिलाओं की तुलना में अधिक कमाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश को अधिक वित्तीय नुकसान हो रहा है।
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कैंसर और इसकी चुनौतियां - फोटो : Adobe stock photos
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

कैंसर रिसर्च यूके के विशेषज्ञों ने कहा, हाल के वर्षों में पहले से कहीं ज्यादा लोगों में कैंसर का निदान किया जा रहा है साथ ही इससे समय से पहले मृत्यु का खतरा भी बढ़ता देखा गया है। बढ़ती उम्र और मोटापे के साथ धूम्रपान-शराब जैसी गड़बड़ आदतें इस जोखिम को बढ़ाती जा रही हैं। 

साल 1975 से 1977 के बीच कैंसर से हर साल 140,000 मौतें होती थीं। 2023-25 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 176,000 प्रति वर्ष हो गया। मौजूदा रुझानों के हिसाब से 2038-40 तक यह बढ़कर 208,000 प्रति वर्ष हो सकता है, जिसका सीधा असर हमें आने वाले वर्षों में अर्थव्यस्था पर और गंभीर चोट के रूप में देखने को मिल सकता है।



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स्रोत
Health is wealth: tackling cancer to grow the economy


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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