शोधकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लग जाए तो इलाज में आसानी होती है और बीमारी को जानलेवा होने से रोका जा सकता है। पीड़ित को किस तरह का कैंसर है, इस बारे में यह जांच तो बताएगी ही, इससे यह भी पता चल पाएगा कि शरीर के किस हिस्से में कैंसर है। बोस्टन के डाना फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट में इस रिसर्च का ट्रायल चल रहा है। बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ग्रेल इंक ने इस जांच को विकसित किया है।
ग्रेल इंक कंपनी ने इसमें सिक्वेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डीएनए की जांच की, जिनसे जीन की सक्रियता या निष्क्रियता का पता चला। इसमें ट्यूमर डीएनए में जाकर पूरे शरीर में ब्लड की मदद से सर्कुलेट होता है। इस टेस्ट में डीएनए में होने वाले रसायनिक बदलाव का विश्लेषण किया जाता है, जिससे कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में ही चल जाता है।
इस रिसर्च के दौरान कुल 3,052 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए, जिनमें 1,531 लोगों के कैंसर से पीड़ित होने का पता चला। शोधकर्ता डॉ. जेफ्री ऑक्सनार्ड के मुताबिक इस नए टेस्ट से यह भी पता चला कि जहां से कैंसर की शुरुआत हुई है, वे कौन से ऊतक हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस जांच ने पहली स्टेज वाले 18 फीसदी कैंसर मरीजों के बारे में सही जानकारी दी, जबकि चौथी स्टेज के मरीजों के बारे में 93 फीसदी सही जानकारी दी। विशेषज्ञ बताते हैं कि आने वाले समय में यह चिकित्सा जगत के लिए बहुत मददगार साबित होगी।