मल त्याग से संबंधित समस्याएं
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कैंसर के मरीज ने बताई अपनी कहानी
क्रिस किर्ट को अगस्त 2024 में मल त्याग में अनियमितता और पेट में लगातार ऐंठन की समस्या होने लगी, लेकिन उन्होंने इसे चिंता की कोई बात नहीं मानकर नजरअंदाज कर दिया। वह बिना असली कारण जाने दर्द को दूर करने के लिए दवा लेते रहे, हालांकि एक समय के बाद ये समस्या बढ़ गई।
एक पोस्ट में क्रिस कहते हैं, जो एक एकमात्र चिंताजनक बात मुझे समझ आ रही है वह शायद यह थी कि मल त्याग करते समय मुझे बिल्कुल दर्द नहीं होता था हालांकि कई बार मल के साथ खून आता था, पर चूंकि दर्द नहीं था इसलिए मैंने कभी इसपर ध्यान ही नहीं दिया।
'यही वह चीज थी जिसने मुझे एक समय के बाद सबसे ज्यादा डरा दिया था और समय के साथ मुझे लगने लगा था कि कुछ तो गड़बड़ है, शायद ये कैंसर है।'
कैंसर के निदान से पहले की घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, मुझे कुछ और भी तरह की सामान्य दिक्कतें हो रही थीं जिनकी आमतौर पर हम अपेक्षा करते हैं जैसे अनियमित मल त्याग, पेट में ऐंठन, शौच जाने की तीव्र इच्छा।
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पेट में कैंसर और इसके कारण होने वाली समस्याएं
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आंतों में कैंसर के बढ़ते मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आंतों में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। पीड़ितों को मल के साथ रक्तस्राव हो सकता है, सबसे बड़ी बात यह है कि ये दर्द रहित हो सकता है इसलिए अक्सर लोगों का इस तरफ ध्यान नहीं जाता है।
कोलोरेक्टल कैंसर या आंतों में कैंसर एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चिंता का विषय है। यह दुनियाभर में तीसरा सबसे आम कैंसर है और कैंसर से संबंधित मौतों का दूसरा प्रमुख कारण है। साल 2022 में,1.9 मिलियन (19 लाख) से ज्यादा नए मामलों का निदान किया गया और 9 लाख से ज्यादा लोगों की इससे मौत हो गई। वैसे तो यह वृद्ध लोगों में ज्यादा प्रचलित समस्या है, लेकिन युवा आबादी में भी इसकी घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है।
मोटापा और कैंसर का जोखिम
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बाउल कैंसर की सालाना बढ़ती दर चिंताजनक
अमेरिकी चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते मोटापे के कारण कैंसर से होने वाली मौतों में तीन गुना वृद्धि हुई है।
द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक डेटा के मुताबिक 25-29 की आयु वालों में हर साल इस कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। आइसलैंड, न्यूजीलैंड, चिली इससे सबसे प्रभावित देशों में से एक है। यहां हर साल युवाओं में कैंसर की दर क्रमश: 7.33, 3.97 और 3.96 प्रतिशत बढ़ती जा रही है। भारत में युवाओं में बाउल कैंसर के मामलों में सालाना वृद्धि की दर 1.26% देखी गई है।
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पेट से संबंधित दिक्कतों को न करें अनदेखा
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कैंसर के लक्षणों को न करें अनदेखा
आंतों में कैंसर (बृहदान्त्र और मलाशय का कैंसर) के लिए मोटापा या अधिक वजन एक बड़ा कारक है। ये इस बीमारी के 11 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है। पुरुषों को विशेष रूप से जोखिम होता है, क्योंकि शोध से पता चलता है कि वयस्कता में प्रत्येक 5 किलोग्राम वजन बढ़ने पर पुरुषों में आंतों के कैंसर होने का जोखिम 10 प्रतिशत बढ़ जाता है।
अगर आपको भी मल में खून आने, मल त्याग की आदतों में बदलाव (जैसे अक्सर दस्त या कब्ज रहने), पेट दर्द और बिना किसी कारण के थकान बने रहने की दिक्कत हो रही है तो सावधान हो जाइए और समय रहते इसका निदान कराएं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि आंतों का कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआती चरणों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं दे सकते हैं।
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स्रोत
Experts pinpoint reason for huge surge in cases of bowel and colon cancer
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