नवाबों के ठाठ लखनऊ से सपनों के शहर मुंबई तक का सफर करने वाले अमिताभ भट्टाचार्य के मन में गायक बनने की तमन्ना थी। लेकिन वह गीतकार बन गए। मुंबई शहर ऐसा ही है वह लोगों को उनके सपनों से अलग एक नया मुकाम देता है। कई लोग वहां बनने कुछ जाते हैं और बन कुछ और जाते हैं। अमिताभ के साथ भी ऐसा हुआ। लखनऊ से वह मुंबई जाकर अपने सपनों की उड़ान को सच साबित करना चाहा। वह सफल भी हुए लेकिन गायक नहीं एक गीतकार के रूप में उनको पहचाना गया। वाहनों के पीछे लिखे शब्दों से गीत बना देने वाले अमिताभ भट्टाचार्य ने पिछले सात आठ सालों में हिंदी फिल्मों की गीत परंपरा में गजब का क्रिएशन दिखाया है। ट्रक के पीछे लिखा था धूम्रपान हानिकारक है, इसे पढ़ा और अमिताभ ने बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है लिखा जो हिट भी रहा।
2008 में फिल्म आमिर से गीतों की दुनिया में कदम रखा
देश की आम बोलचाल को गीतों का रूप देने वाले अमिताभ भट्टाचार्य ने 2008 में फिल्म आमिर से गीतों की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद तो एक से एक हिट गीतों का कारवां चल पड़ा। लोगों ने इनके गीतों को खूब पसंद किया। चन्ना मेरिया, ऐ दिल हैसिक, कबीरा, मस्त मगन, राबा, जनेसीब, अभ्य मुझ में काम, नैना, जन्म जन्म, गरुआ और ज़लाइमा गीतों ने तो बॉलीवुड को नई आभा से सराबोर कर दिया। अमिताभ मुंबई में अपना ऑडिशन देने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते थे। इस दौरान उन्होंने अपनी निराशा को आशा में बदलने के लिए गीत लिखने की सोची, जो उनके लिए बेहतर रहा। संगीतकार प्रीतम दा ने अमिताभ की सोच और संघर्ष को एक नया कलेवर दिया।
अमिताभ भट्टाचार्य अपनी उम्र से कहीं आगे हैं
फिल्म की सिचुएशन को समझते हुए उसे सरल शब्दों में गीतों में ढालने में अमिताभ भट्टाचार्य अपनी उम्र से कहीं आगे हैं। लेकिन वह आज भी साहिर लुधियानवी, गुलजार और आनंद बक्षी को गीतों के उम्दा उस्ताद मानते हैं। नए गीतकारों में प्रसून जोशी उन्हें खासतौर पर पसंद हैं। वह कहते हैं कि वह साहित्य से जुड़े नहीं रहे। वह तो गीतकारों के बोल से प्रभावित होकर गीतों को लिखने की शुरुआत की।
अमिताभ चाहते हैं कि वह हमेशा अच्छा लिखें और दिल से लिखें
अमिताभ की कोशिश रहती है कि वह हमेशा अच्छा लिखे और दिल से लिखे। दिल से किए गए किसी भी कार्य को वह एक इबादत मानते हैं। शब्दों की व्यूहरचना से दूर सरल शब्दों के साथ आम आदमी के भावों को अपने गीतों में व्यक्त करने वाले अमिताभ की माने तो जब भी लिखने बैठता हूं तो सहज होकर गहरे भाव आते जाते हैं। ऐसे भाव आने के दौरान अगर आप अपनी सोच को बिखरने न दे तो शब्द अपने आप गीतों का रूप ले लेंगे।
दंगल के गीत काफी चर्चित हुए
उड़ान, बैंड बाजा बारात, अग्निपथ, लुटेरा, ये जवानी है दीवानी, बॉम्बे वेलवेट, चेन्नै एक्सप्रेस, दंगल आदि फिल्मों में अमिताभ ने गीत लिखे हैं। हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगाट की जीवनी पर बनी आमिर खान की फिल्म दंगल के गीतों ने तो अमिताभ भट्टाचार्य को एक नया मुकाम दिया। वह अभी लोकप्रिय गीत लिख रहे हैं। आगे पटकथा लिखने का भी उनका मन है। पटकथा और गीत लिखकर वह जावेद अख्तर की श्रेणी पर पहुंचना चाहेंगे।