आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
यह जानकारी आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने एक अतिरिक्त हलफनामे में दी है। यह हलफनामा उस याचिका पर दाखिल किया गया था जिसमें कहा गया था कि सिविल सेवा परीक्षा में नेत्रहीन या कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों को उचित अवसर नहीं मिल रहा है।
आयोग ने अपने हलफनामे में कहा, "आयोग ने इस पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की है और सिद्धांत रूप में यह निर्णय लिया है कि दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की सुविधा शुरू की जाएगी। हालांकि, इस समय इसके लिए आवश्यक ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) उपलब्ध नहीं है।"
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। यह याचिका ‘मिशन एक्सेसिबिलिटी’ नामक संस्था ने दायर की थी, जिसकी ओर से अधिवक्ता संचित आइन ने पैरवी की।
अगले परीक्षा सत्र से पहले सुविधा उपलब्ध कराने की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि यूपीएससी को यह व्यवस्था समयबद्ध तरीके से लागू करने का निर्देश दिया जाना चाहिए ताकि अगली परीक्षा सत्र से पहले यह सुविधा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों की सुगम्यता, चार्ट-डायग्राम और क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नपत्रों के लिए उपयुक्त सॉफ्टवेयर जैसी बातों पर परामर्श भी आवश्यक है।
इस पर बेंच ने कहा, "यह यूपीएससी पर निर्भर है कि वे परामर्श करें या नहीं। उन्हें पता है कि उनके प्रश्नपत्र कैसे तैयार होते हैं और वे स्क्रीन रीडर के लिए उन्हें कैसे उपलब्ध करा सकते हैं।" अदालत ने कहा कि यदि यूपीएससी चाहे तो इस परामर्श प्रक्रिया को अपना सकता है। इसके बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी से यह भी पूछा कि इसे लागू करने में कितना समय लगेगा। यूपीएससी के वकील ने बताया कि इसे अगले वर्ष की परीक्षा चक्र में लागू करने की योजना है। बेंच ने यह भी कहा कि अगर यह सुविधा केवल कुछ केंद्रों तक सीमित रही तो दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को अन्य शहरों की यात्रा करनी पड़ेगी, जो अनुचित होगा।
यूपीएससी के पास नहीं खुद का परीक्षा ढांचा
अपने हलफनामे में यूपीएससी ने कहा कि उसके पास खुद का परीक्षा ढांचा नहीं है और वह पूरी तरह राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, स्कूलों और कॉलेजों के सहयोग पर निर्भर है। इसी वजह से आयोग ने 7 जुलाई को समन्वयक अधिकारियों (जैसे जिला कलेक्टर, जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त आदि) को पत्र लिखकर इस सुविधा को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भी जिला प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पत्र भेजा है। 22 से 25 जुलाई के बीच यूपीएससी के वरिष्ठ अधिकारियों ने परीक्षा आयोजन से जुड़े समन्वयक अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की थी। इन बैठकों में कंप्यूटर/लैपटॉप पर स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की उपलब्धता, प्रत्येक केंद्र पर दृष्टिबाधित उम्मीदवारों की संख्या, सॉफ्टवेयर की खरीद, डिजिटल प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ट्रांसमिशन व्यवस्था और प्रत्येक शहर में कम से कम एक केंद्र पर आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
यूपीएससी ने देहरादून स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद विजुअल डिसएबिलिटी (NIEPVD) को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि उनके और उनके क्षेत्रीय केंद्रों के कंप्यूटर लैब का उपयोग ऐसे उम्मीदवारों की परीक्षा के लिए किया जा सके जो स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की सहायता लेना चाहें।
28 जुलाई को यूपीएससी और NIEPVD के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठक हुई, जिसमें स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर के उपयोग और वस्तुनिष्ठ (Objective) व वर्णनात्मक (Subjective) प्रश्नपत्रों को संभालने के तरीकों पर चर्चा की गई।
आयोग ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD), नई दिल्ली को भी पत्र लिखकर NIEPVD और उसके नौ क्षेत्रीय केंद्रों की प्रयोगशालाओं के उपयोग की संभावना पर विचार करने को कहा है।
DEPwD ने जवाब में कहा कि वे इन केंद्रों को दृष्टिबाधित उम्मीदवारों की परीक्षा के लिए समर्पित केंद्र के रूप में विकसित करने के इच्छुक हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर, परीक्षा संचालन के प्रोटोकॉल, प्रश्नपत्रों का सुगम प्रारूप और सॉफ्टवेयर की सुरक्षा जैसे पहलुओं की जिम्मेदारी यूपीएससी की ही होगी।
यूपीएससी ने कहा कि वह DEPwD द्वारा दिए गए सुझावों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है। हलफनामे में यह भी कहा गया कि दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर के उपयोग का निर्णय लेने के लिए सिविल सेवा परीक्षा नियम 2025 में किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है।