जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, सरकार बताए कि यूपीएससी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2022 के लिए तय सीटों में महिलाओं का आंकड़ा बढ़ा क्यों नहीं। पिछले साल आपने कहा था कि बुनियादी ढांचे की समस्या के कारण महिलाओं की संख्या कम है। अब वर्ष-2022 के लिए भी आपने इतनी ही संख्या में महिलाओं को चुनने का प्रस्ताव रखा है। पीठ ने कहा, 19 सीटों की व्यवस्था हमेशा के लिए नहीं हो सकती। यह केवल तदर्थ उपाय था। शीर्ष अदालत ने केंद्र को इस संबंध में हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया और संबंधित पक्षों से दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई छह मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 22 सितंबर को एक आदेश देकर महिलाओं के लिए नवंबर की एनडीए प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के दरवाजे खोले थे।
सेना में 10, नौसेना में 3 और वायुसेना में 6 महिलाएं जाएंगी
याचिकाकर्ता कुश कालरा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील चिन्मय प्रदीप शर्मा ने कहा कि उन्होंने एक अतिरिक्त हलफनामा दिया है। इसमें बताया है कि 14 नवंबर, 2021 को हुई एनडीए की परीक्षा के बाद सेवा चयन बोर्ड परीक्षा व चिकित्सा परीक्षण के लिए 8009 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। इनमें 1002 महिलाएं और 7007 पुरुष हैं। यूपीएससी और सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार एनडीए-2, 2022 के जरिये 400 कैडेट चुने जाएंगे। इनमें से 10 महिलाओं समेत 208 उम्मीदवार सेना में जाएंगे। नौसेना तीन महिलाओं सहित 42 उम्मीदवारों को लेगी जबकि भारतीय वायुसेना 120 उम्मीदवारों को स्वीकार करेगी, जिनमें छह महिलाएं होंगी। इस प्रकार जून, 2022 में एनडीए में शामिल होने वाली महिलाओं की कुल संख्या 19 रहेगी।
2023 में एनडीए में शामिल होने वाली महिलाओं की संख्या भी 19 ही रहेगी
शर्मा ने कहा कि यूपीएससी द्वारा 22 दिसंबर, 2021 को 10 अप्रैल, 2022 को होने वाली एनडीए-एक, 2022 परीक्षा के लिए जारी परीक्षा नोटिस में भी कुल 400 रिक्तियां हैं। इसमें भी महिलाओं की कुल संख्या 19 ही रखी गई है। 22 दिसंबर, 2021 के नोटिस से साफ है कि जनवरी, 2023 में एनडीए में शामिल होने वाली महिलाओं की संख्या 19 ही रहेगी। शर्मा ने कहा कि केंद्र द्वारा दायर 20 सितंबर, 2021 के हलफनामे में कहा गया था कि इस साल मई (2022) तक आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। शर्मा ने 2023 में नौसेना अकादमी में केवल 30 पुरुष उम्मीदवारों का प्रवेश तय किए जाने को भी मनमाना करार दिया और कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 का उल्लंघन है।
सिर्फ अवसंरचना नहीं, कई बातों पर निर्भर है महिलाओं का प्रवेश : केंद्र
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट से कहा कि एनडीए में महिलाओं का प्रवेश सिर्फ अवसंरचना ढांचे पर ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारकों पर भी निर्भर है और इनमें रक्षा बलों की जरूरत भी एक कारण है। कोर्ट हमें कुछ समय दे ताकि हम मामले में विस्तृत हलफनामा दे सकें। इसमें हम महिलाओं की सीमित संख्या की वजहें बताने की कोशिश करेंगे। कोर्ट ने कहा, हम समझते हैं कि रक्षा बलों में सभी क्षेत्र महिलाओं के लिए खुले नहीं हैं और वहां अभी पुरुषों और महिलाओं की संख्या बराबर नहीं हो सकती।