यह है 12,022 पदों का विस्तृत विवरण
कुल 12,022 पदों में से अधिकारी के 14 और इंस्पेक्टर (कॉमर्शियल) के 63 पदों को खत्म किया गया है। अन्य पद तकनीशियन व ग्रुप-डी (अब ग्रुप-सी) के थे। बता दें कि पदों को गैरजरूरी करार देने का एक मुख्य कारण आउटसोर्सिंग भी है। राजधानी, शताब्दी, मेल-एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के जनरेटर में इलेक्ट्रिकल-मैकैनिकल तकनीशियन, कोच में सहायक, ऑनबोर्ड सफाई आदि कामों को ठेके पर दे दिया गया है, जिसकी वजह से इन पदों को समाप्त कर दिया गया है। बता दें कि जानकारों का मनना है कि रेलवे के इस कदम की वजह से उसकी क्षमता कम हो जाएगी।
यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है- संसदीय समिति
रेलवे यूनियन एआईआरएफ के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि पदों को कर्मचारियों के कार्य अघ्ययन और क्षमता के आधार पर समाप्त किया जा रहा है। लेकिन इन रिपोर्ट को तैयार करने के लिए केवल 48 अथवा 72 घंटे का ही समय दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों की कार्य क्षमता को नापा नहीं जा सकता है। वहीं इस पर संसदीय समितियों का कहना है कि ट्रेन ड्राइवर, सहायक ड्राइवर, गार्ड, गैंगमैन जैसे संरक्षा वर्ग के पदों पर भर्ती न रखना गलत है। यह यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करने जैसा है। इसकी वजह से मौजूदा कर्मचारियों को 22 से लेकर 24 घंटों तक काम करना पड़ रहा है।