बता दें कि केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में भर्तियों को लेकर आए दिन प्रदर्शन होना आम बात है। विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठन, खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार पर दबाव डालते रहते हैं। रिक्त पड़े पदों के कारण मंत्रालयों और विभागों का कामकाज प्रभावित होता है। कोरोनाकाल में अनेक पदों को रिटायर्ड कार्मिकों को नियुक्ति पत्र देकर भरा गया है। ऐसे में कई तरह के मापदंडों का उल्लंघन भी हुआ है। हाल ही में सीवीसी ने इस तरह की भर्ती पर ऐतराज जताया था। सीवीसी का कहना था कि रिटायर्ड लोगों को भर्ती करने से पहले विजिलेंस की मंजूरी नहीं ली जा रही। यह एक गलत परंपरा है। मनमर्जी से पदों का विज्ञापन जारी कर दिया जाता है। इससे भर्ती के मौलिक नियमों और संगठन के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है।
पिछले संसद सत्र के दौरान लोकसभा में पूछे एक सवाल का जवाब देते हुए कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय स्तर पर खाली पड़े पदों के बारे में जानकारी दी थी। केंद्र सरकार के 73 मंत्रालयों और विभागों की स्थिति ऐसी थी कि उनमें जितने पद स्वीकृत हैं, वे भी पूरी तरह नहीं भरे जा सके। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को छोड़कर एक भी ऐसा मंत्रालय या विभाग नहीं था, जहां पर स्वीकृत पदों की संख्या के बराबर भर्ती कर ली गई हो। कैबिनेट सचिवालय, गृह मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा, रक्षा (सिविल), व्यय, रेलवे, ग्रामीण विकास, अंतरिक्ष और संसदीय कार्य सहित सभी मंत्रालयों एवं विभागों में 3802779 पद स्वीकृत हैं, जबकि यहां पदस्थ कार्मिकों की संख्या 3118956 बताई गई है।
यह सवाल भी पूछा गया था, क्या फरवरी 2021 की स्थिति के अनुसार, केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और पीएसयू में विभिन्न समूहों के लगभग सात लाख पद खाली पड़े हैं। इसके जवाब में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया, फरवरी 2021 तक पीएसयू की रिक्तियों का विवरण उपलब्ध नहीं है। मार्च 2016 और मार्च 2018 की स्थिति के मुताबिक, सरकारी कार्मिकों का डाटा मौजूद है। साल 2016 में स्वीकृत पदों की संख्या 3633935 के मुकाबले पदस्थ कर्मियों का आंकड़ा 3221183 रहा था। 2018 में 38 लाख स्वीकृत पदों की तुलना में 31 लाख कार्मिक पदस्थ थे।
डीओपीटी ने गत सप्ताह जारी अपने निर्देशों में कहा है, सभी मंत्रालय यह भी बताएंगे कि वे कितने समय के भीतर इन पदों को भरेंगे। इसके लिए उन्हें यूपीएससी या एसएससी से जो समन्वय करना है, वह समय रहते कर लें। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसे किन्हीं कारणों से टाला नहीं जाएगा। उसकी तिथि आगे भी नहीं बढ़ेगी। वजह, इसका नुकसान उन लाखों उम्मीदवारों को होता है जो अपनी शिक्षा व आयु के मुताबिक इन पदों के लिए आवेदन करते हैं। सभी मंत्रालय व विभाग यह जानकारी देंगे कि उन्होंने फलां अवधि में इतने पदों पर स्थायी नियुक्ति, पदोन्नति के जरिए पद भरना या किसी अन्य तरीके से नियुक्ति की है। खाली पदों को भरने के लिए क्या तरीका अपनाया गया है। नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद अगर पद खाली पड़े रहते हैं तो उसका क्या कारण है। वे पद दोबारा से कब तक भरे जाएंगे, यह जानकारी देनी पड़ेगी। मंत्रालयों को भर्ती से संबंधित एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजनी होगी।