झारखंड में ब्लैक डायमंड (कोयला) के लिए लोग राजनीतिक रसूख, पैसे और पावर का पूरा इस्तेमाल करते हैं। बेरमो के करगली में कोयला के उठाव के लिए भी कुछ लोग अपना प्रभाव दिखाना चाहते थे। इसके लिए उन लोगों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निजी सहायक (पीए) कनिष्क सिंह बन कर राजभवन में फोन किया। मकसद था कुछ लोगों को राज्यपाल से मिलवाना। वे अपनी चाल में कामयाब होते, इससे पहले पुलिस ने उन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
एसएसपी साकेत कुमार सिंह ने बताया कि कनिष्क सिंह बताकर फोन करने वालों में तीन लोगों को राजभवन से गिरफ्तार किया गया है। उनमें एआईसीसी का सदस्य व लोजपा का पूर्व राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष प्रदीप मिश्र, गुड़गांव का डॉ सैयद बुरहानी और पटना का मनोज सिंह शामिल है। मनोज सिंह झारखंड के एक बड़े नेता का रिश्तेदार बताया जाता है। उनके पास से पुलिस ने दो सिम कार्ड और एक स्कारपियो बरामद किया है।
ऐसे हुआ खुलासा
एसएसपी के मुताबिक राजभवन में कनिष्क सिंह बनकर सैयद बुरहानी ने फोन किया। उसने राज्यपाल से कुछ लोगों को मिलवाने के लिए समय निर्धारित करने का अनुरोध किया। इस पर राजभवन के अधिकारियों ने जब कनिष्क सिंह से इस बारे में जानकारी ली तो उन्होंने फोन करने से ही इंकार कर दिया।
इसके बाद अधिकारियों ने आरोपियों को शाम साढ़े पांच बजे राजभवन बुलाया। राज्यपाल के एडीसी अभिषेक सिंह व गगन सिंह हंसपाल ने तीन आरोपियों को गेस्ट हाउस में बैठाया। और फिर इस बारे में एसएसपी को सूचना दी। कोतवाली पुलिस ने तीन को गिरफ्तार कर लिया।
फोन करने का कारण
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ये लोग कोयला का व्यवसाय करते हैं। बेरमो के करगली में कोयला के उठाव के लिए अपना दबदबा दिखाने के लिए उन्होंने ऐसा किया। वे कुछ लोगों को राज्यपाल से मिलवाना चाहते थे। एसएसपी ने बताया कि आरोपी मनोज सिंह झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह का रिश्तेदार है या नहीं, इसकी जांच चल रही है।