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झारखंड को 12 साल में 50 हजार करोड़ का नुकसान

Sat, 02 Feb 2013 11:49 AM IST
रांची/इंटरनेट डेस्क
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झारखंड के प्रवेश मार्गों पर नौ में से एक भी चेक पोस्ट न बनने से राज्य को करीब 50 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। 12 साल में राज्य सरकार एक भी चेकपोस्ट नहीं बना सकी। यहां तक की चेक पोस्ट बनाने वाली कंपनी भी भाग चुकी है।
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साल 2001 में बाबूलाल मरांडी की सरकार ने राज्य के विभिन्न प्रवेश मार्गों पर नौ कंपोजिट चेक पोस्ट बनाने का निर्णय लिया था। इन चेक पोस्ट से राज्य को हर साल चार हजार करोड़ का राजस्व मिलने का अनुमान था। इस तरह 12 साल में राज्य को लगभग 50 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो चुका है।

इतना ही चेक पोस्ट का निर्माण करने वाली दिल्ली की कंपनी केएस सॉफ्टवेयर सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड भी झारखंड में करोबार समेट कर बंद हो चुकी है। कंपनी ने अपना क्षेत्रीय कार्यालय भी बंद कर दिया है। केएस सॉफ्टवेयर को वर्ष 2001 में 44.24 करोड़ रूपये में तीन वर्ष की अवधि में चेक पोस्ट निर्माण का काम दिया गया था।
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पांच स्थानों पर चेक पोस्ट निर्माण का आंशिक काम करने के लिये कंपनी को लगभग छह करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया था। उसके बाद से परिवहन विभाग द्वारा कोई भुगतान नहीं किया गया है। कंपनी ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर असहयोग का आरोप भी लगाया है।

चेक पोस्ट निर्माण का काम इतनी धीमी रफ्तार से चला की 12 साल में चार प्रस्तावित चेक पोस्ट (बांसजोर, धुलियान, चौपारण व कोडरमा) का वर्क ऑर्डर भी जारी नहीं किया गया है। बाकी पांच चेक पोस्ट (चिरकुंडा, चास मोड़, बहरागोड़ा, मुरी सेमर और मांझाटोली) का वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद भी निर्माण 30 फीसदी भी पूरा नहीं हुआ है।

कंपनी का राज्य सरकार पर आरोप है कि चेक पोस्ट निर्माण के लिये राज्य सरकार ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। किसी चेक पोस्ट के लिये अप्रोच रोड, बिजली या सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है तो किसी को जमीन तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। विभिन्न विभागों से अनापत्ति हासिल करने के लिये बनायी गयी फाइलें सचिवालय में पड़ी हैं। जबकि यह सभी व्यवस्थायें करने का जिम्मा राज्य सरकार का था।
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