गिरिडीह के पचंबा की उषा देवी की ब्लैक फंगस के कारण हुई मौत मामले में अब जांच एक विशेषज्ञों की कमेटी करेगी। उषा देवी 5 मई को कोविड पॉजिटिव हुई थी, इसके बाद वह म्यूकरमाइकोसिस यानि ब्लैक फंगस से पीड़ित हो गई थीं। वहीं अस्पताल पर इलाज में लापरवाही करने का आरोप है।
अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। एमजीएम, जमशेदपुर के ईएनटी एचओडी प्रो. डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में गठित कमेटी में निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य के तकनीकी सलाहकार डॉ. राकेश दयाल और सदर अस्पताल, रांची के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार को शामिल किया गया है।
रिम्स में हुई थी सर्जरी
बता दें कि उषा देवी पांच मई को कोरोना पॉजिटिव पाई गईं थीं, इसके बाद उनको ब्लैक फंगस ने जकड़ लिया। उनको गिरिडीह के सदर अस्पताल से इन्हें रिम्स रेफर कर दिया गया था। 17 मई को उन्हें रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। महिला के बेटे गौरव गुप्ता के अनुसार इलाज के दौरान ही उनकी मां की बाईं आंख की रोशनी भी चली गई।
रिम्स के डॉक्टरों ने सही से इलाज नहीं किया, बल्कि ऑपरेशन के नाम पर टाल-मटोल कर रहे थे और फिर महिला को इलाज के लिए बाहर ले जाने को कहा गया। ये मामला सोशल मीडिया पर भी उछला था, महिला के बच्चों ने मां के लिए सरकार से इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी थी। फिर खुद हाई कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया था और उषा देवी को सही इलाज के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद हुआ ऑपरेशन
हाईकोर्ट की कड़ाई के बाद उषा देवी का रिम्स में ही आठ जुलाई को ऑपरेशन हुआ। लेकिन उसके बाद उसकी तबियत बिगड़ती चली गई। ऑपरेशन के 72 घंटे बाद उनकी मौत हो गई। गौरव गुप्ता का आरोप है सुबह स्थिति बिगड़ी तो कोई देखने नहीं आया। ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल गिरने से उसकी मां की मौत हो गई।
अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर कमेठी बैठा दी गई है, वहीं देखते है इसमें कमेटी किसे जिम्मेदार मानती है। वहीं उषा देवी के बच्चों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही करने के आरोप लगाए हैं।