झारखंड हाईकोर्ट ने सिकिदरी हाइडल प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता के मामले में जेएसईबी के तत्कालीन अध्यक्ष शिवेंद्र नाथ वर्मा की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
झारखंड उच्च न्यायालय में सिकिदरी हाइडल प्रोजेक्ट यानी स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना में हुए करोड़ों रुपये के कथित अनियमितता मामले में झारखंड राज्य बिजली बोर्ड (जेएसईबी) के तत्कालीन अध्यक्ष शिवेंद्र नाथ वर्मा की याचिका पर सुनवाई हुई।
विज्ञापन
अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। जेएसईबी के पूर्व अध्यक्ष शिवेंद्र नाथ वर्मा ने सीबीआई की विशेष कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है।
आपराधिक साजिश का आरोप
यह मामला स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना, सिकिदरी, रांची का है। यहां 65-65 मेगावाट के दो पावर हाउस 1977 और 1980 में भेल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने लगाए थे। सीबीआई के अनुसार, वर्ष 2011-12 में जेएसईबी के अधिकारियों ने भेल और एनपीईएल के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची।
जिस मरम्मत कार्य का अनुमानित बजट महज 2.5 करोड़ रुपये था, उसे नियम ताक पर रखकर 20.87 करोड़ रुपये में भेल को आवंटित कर दिया गया। शिवेंद्र नाथ वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने इस वित्तीय आवंटन को मंजूरी दी थी।