सावन के बाद महादेव का जलाभिषेक कैसे कर सकेंगे, हकीकत बता रहे अधिकृत पंडा।
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क्या है वास्तविक व्यवस्था, क्या आगे रहना है?
झारखंड से बिहार ही नहीं, देशभर के भक्तों के बीच चल रही चर्चा की वास्तविकता के लिए 'अमर उजाला' ने देवघर के पंडा धर्म रक्षिणी सभा से बात की। सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चन्द्र शेखर खवाड़े ने स्वीकार किया कि ऐसी चर्चा चल निकली है, लेकिन उन्होंने इसे अफवाह करार देते हुए कहा कि हमेशा की तरह सावन में अरघा लगाकर जलार्पण किया जाएगा। अभी भी अरघा नहीं लगा है और सावन के बाद भी वह हटा लिया जाएगा। सावन बाद स्पर्श पूजा फिर होने लगेगी। इस बार सावन में भक्तों के लिए एक और नई सुविधा दी जा रही है। जो भक्त शीघ्रदर्शनम या सामान्य कतार के रास्ते मुख्य अरघा तक नहीं जाना चाहते हैं या खुद को सक्षम नहीं पाते हैं, उनके लिए बाह्य अरघा की व्यवस्था रहेगी। इसमें गर्भगृह का दर्शन नजदीक से नहीं हो सकेगा, लेकिन जलाभिषेक हो जाएगा। यह वैकल्पिक व्यवस्था है। निकास गेट के उत्तर, जहां बाबा का नीर बहता है, यह बाह्य अरघा लगाया गया है।
शीघ्रदर्शनम कूपन का रेट दोगुना रहेगा लागू
सामान्य दिनों में देवघर के बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की दो व्यवस्था रहती है। एक तो सामान्य कतार और दूसरा झारखंड सरकार का 300 रुपये का शुल्क चुकाकर शीघ्रदर्शनम कूपन। त्रिपंचमी, शिवरात्रि, भादो, नववर्ष समेत पूरे सावन में शीघ्रदर्शनम कूपन का रेट दोगुना कर दिया जाता है। सावन में यह रेट 600 रुपये प्रति व्यक्ति रहेगा। इस कूपन में भीड़ अपेक्षाकृत सामान्य से कम रहती है, लेकिन गर्भगृह का दर्शन करते समय यह कतार एक जगह पर मिल जाती है। यानी, यह सिर्फ भीड़ कम रहने के कारण जल्दी पहुंचने का एक रास्ता होता है।