झारखंड उच्च न्यायालय ने गुमला से सितंबर 2018 से लापता 15 वर्षीय किशोरी के मामले में पुलिस अनुसंधान में लापरवाही और निगरानी में बरती गई चूक पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद और न्यायमूर्ति अखिल कुमार की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य के गृह विभाग और गुमला पुलिस अधीक्षक से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब तलब किया है। उच्च न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को यह बताने का निर्देश दिया है कि बच्ची के लापता होने के बाद अनुसंधान सही तरीके से क्यों नहीं किया गया और जांच में ढिलाई क्यों बरती गई।
जांच में लापरवाही और क्लीन चिट पर सवालॉ
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि बच्ची के लापता रहने से संबंधित प्रगति रिपोर्ट समय पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), गुमला को न भेजने के मामले पर वन मैन कमेटी ने विचार क्यों नहीं किया। अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि वर्ष 2018 से वर्ष 2022 तक के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और अनुसंधानकर्ता को किस आधार पर क्लीन चिट दे दी गई। सरकार की ओर से अदालत में स्वीकार किया गया कि अनुसंधानकर्ता ने 23 अक्तूबर को डालसा को रिपोर्ट भेजी थी। इस देरी पर सरकार ने बिना शर्त माफी भी मांगी है। इस पर अदालत ने सवाल किया कि जब प्राथमिकी दर्ज होने के चार महीने के भीतर पहली रिपोर्ट और उसके बाद प्रत्येक तीन महीने पर प्रगति रिपोर्ट डालसा को भेजी जानी थी, तो इस निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।
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कस्टडी मांगने में देरी पर जताई आपत्ति
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने पीठ को बताया कि पुलिस ने मुख्य आरोपित भूखली लकड़ा को छह जून को गिरफ्तार कर लिया है। उससे गहन पूछताछ करने के लिए पुलिस कस्टडी की मांग को लेकर अदालत में आवेदन दिया गया है। इस पर उच्च न्यायालय ने कड़ा ऐतराज जताते हुए सवाल किया कि आरोपित की गिरफ्तारी के चार-पांच दिन बीत जाने के बाद पुलिस कस्टडी मांगना कहां तक उचित है।
सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट में संदिग्ध मिली आरोपित
सरकार ने सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से आरोपित का नार्को टेस्ट नहीं हो सका था। इसके बाद गुजरात के गांधीनगर में मुख्य आरोपित भूखली लकड़ा का सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट कराया गया, जिसमें वह संदिग्ध पाई गई है। गांधीनगर में उसके दो पूरक परीक्षण भी कराए गए हैं। प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2018 से 2022 तक के अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई, जबकि उस समय प्राथमिकी दर्ज करने में ही देरी हुई थी। लापता बच्ची की मां ने अपनी बेटी की बरामदगी के लिए उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है।