झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया कि पिछले महीने की हिंसा की जांच कर रहे रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का तबादला क्यों किया गया। राज्य की राजधानी में 10 जून को पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद दो लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना की जांच एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा कर रहे थे। बाद में आपराधिक जांच विभाग (CID) ने मामले को अपने हाथ में ले लिया और हाल ही में उनका तबादला कर दिया गया। मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया था कि राज्य सरकार उचित जांच करने की इच्छुक नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि घटना की जांच के लिए एसएसपी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था जिसके बाद मामला सीआईडी को सौंप दिया गया। एक मौखिक टिप्पणी में पीठ ने कहा कि राज्य ने हाल ही में एसएसपी को बदल दिया है और इस मामले पर कोई अहम काम नहीं किया है।
अदालत ने गृह सचिव राजीव अरुण एक्का और पुलिस महानिदेशक नीरज सिन्हा को अपना-अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने सरकार से यह भी पूछा कि घटना के चश्मदीदों को हिंसा के अपराधियों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं दिखाए गए। पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर 10 जून को हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने रांची को हिला दिया था।