झारखंड और ओडिशा में दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) और पूर्वी तट रेलवे (ईसीओआर) क्षेत्र की कम से कम 11 ट्रेनें रद्द कर दी गई। वहीं 12 अन्य ट्रेनों का मार्ग बदल दिया गया। दरअसल, बुधवार से तीन पूर्वी राज्यों में कुर्मी संगठनों द्वारा बुलाए गए अनिश्चितकालीन रेल नाकाबंदी के कारण ऐसा किया गया है।
अनिश्चितकालीन रेल नाकाबंदी का एलान
कुर्मी संगठन ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 20 सितंबर से अनिश्चितकालीन रेल नाकाबंदी का एलान किया है। उन्होंने कुर्मी समुदाय को एसटी और कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ने की मांग की है। एसईआर ने रांची रेलवे डिविजन की नौ एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द और आठ को डायवर्ट कर दिया।
रेलवे अधिकारी ने बताया कि जो भी ट्रेन अपने गणतव्य से रांची प्रवेश करने वाली थी, उसे या तो रद्द कर दिया गया है या उनका रूट डायवर्ट कर दिया गया है। वहीं ईसीओआर ने दो ट्रेनों को रद्द और चार अन्य ट्रेनों को डायलर्ट किया है। झारखंड के कुर्मी संगठन टोटेमिक कुर्मी विकास मोर्चा के अध्यक्ष शीतल ओहदर ने बताया कि पश्चिम बंगाल के आदिवासी कुर्मी समाज और ओडिशा के कुर्मी सेना भी इस आंदोलन में शामिल होंगे।
झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ट्रेन रूट अवरुध
झारखंड के मुरी, गोमोह, निमडीह, घाघरा स्टेशन, वहीं पश्चिम बंगाल के खेमासुली और कुस्तौर और ओडिशा में हरिचंदनपुर, जरईकेला और धानपुर में ट्रेन ट्रेक को 20 सितंबर से अवरुध किया जाएगा। संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि कुर्मी समुदाय के हजारो लोग परंपरागत पोशाक में ड्रम और अन्य म्यूजिकल यंत्रों पर छऊ, पाटा, नटुवा और झूमर नृत्य कर प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे। ओहदर ने कुर्मी सांसदों से संसद के विशेष सत्र में इस मुद्दे को उठाने की भी मांग की है।
आदिवासी कुर्मी समाज के प्रवक्ता हरमोहन महतो ने दावा किया है कि ब्रिटिश शासन के दौरान 1913 में कुर्मियों को आदिवासी जनजातियों में सूचीबद्ध किया गया था। जब केंद्र ने छह सितंबर 1950 में एसटी की सूजी जारी की थी तो पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा में कुर्मी को ओबीसी में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि कुर्मी प्राचीनकाल से ही आदिवासी रहे हैं। साथ ही उन्होंने कुर्मी समुदाय की आबादी दो करोड़ से अधिक होने का भी दावा किया है।