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Jharkhand: JMM विधायक ने अपनी ही सरकार के खिलाफ रांची में निकाली रैली, अधिवास नीति को लागू करने की मांग

Sun, 23 Apr 2023 09:46 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

रांची के पुराने विधानसभा मैदान में आयोजित 'जामिन-खतियां बचाओ महाजुतन' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक लोबिन हेंब्रम ने कहा कि रैली का आयोजन इसलिए किया गया क्योंकि 1932 की खतियान आधारित अधिवास नीति लागू नहीं की गई है।
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JMM MLA Lobin Hembrom - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) विधायक लोबिन हेंब्रम ने 1932 के भूमि रिकॉर्ड के आधार पर अधिवास नीति को लागू करने और राज्य में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार योजना की मांग को लेकर रविवार को यहां एक रैली की। रांची के पुराने विधानसभा मैदान में आयोजित 'जामिन-खतियां बचाओ महाजुतन' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक ने कहा कि रैली का आयोजन इसलिए किया गया क्योंकि 1932 की खतियान आधारित अधिवास नीति लागू नहीं की गई है।

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उन्होंने कहा, मैं सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़ा हूं और हम सत्ता में हैं। इसके बावजूद महाजुतन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि 1932 की खतियान आधारित अधिवास नीति अभी तक लागू नहीं हुई है। मैं इसके लिए आवाज उठाऊंगा।झारखंड कैबिनेट ने पिछले साल सितंबर में 1932 भूमि रिकॉर्ड का  उपयोग यह निर्धारित करने के लिए एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी थी कि कौन स्थानीय हैं।
 

यह फैसला आदिवासियों की इस मांग की पृष्ठभूमि में लिया गया था कि 1932 में ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए अंतिम भूमि सर्वेक्षण (खतियान) को स्थानीय लोगों को परिभाषित करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाए। हेंब्रम ने यह भी आरोप लगाया कि आदिवासियों की जमीन और नौकरियों को लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा, अगर सरकार अधिवास नीति को लागू नहीं करती है, तो हम आधिवासी भूमि की रक्षा के लिए लड़ेंगे। मैं अपनी झामुमो सरकार से कहना चाहता हूं कि कम से कम उन वादों को पूरा करें, जो चुनाव प्रचार के दौरान किए गए थे। 
 
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अधिवास नीति के लिए 1932 को कट-ऑफ वर्ष बनाने से उन लोगों के वंशजों को मदद मिलेगी, जो उस वर्ष से पहले वर्तमान झारखंड में रह रहे थे, उन्हें सरकारी नौकरी पाने जैसी विभिन्न योजनाओं में लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि झारखंड राज्य छात्र संघ के बैनर तले कई छात्र संगठनों ने सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 100 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर 17 से 19 अप्रैल तक प्रदर्शन किया था।

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