झारखंड में वर्ष 2016 की हाईस्कूल शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच तेज हो गई है। झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय जांच आयोग ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग और स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी है।
आयोग ने दोनों विभागों को एक सप्ताह के भीतर बिंदु-वार जवाब और संबंधित दस्तावेज जमा करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्तूबर 2026 को दोपहर तीन बजे पुराने उच्च न्यायालय परिसर में होगी।
गत 6 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने 600 से अधिक अभ्यर्थियों की ओर से अपना पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने आयोग के समक्ष आरोप लगाया कि यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया राज्यस्तरीय मेधा सूची तैयार किए बिना ही संचालित कर ली गई। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि संबंधित विषय और श्रेणी में उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया।
कई अन्य अधिवक्ताओं ने भी इसी प्रकार की गंभीर शिकायतें आयोग के सामने रखीं। आयोग ने सभी याचिकाकर्ताओं के व्यक्तिगत बयान दर्ज करने में व्यावहारिक कठिनाई को देखते हुए उनके वकीलों से निर्धारित प्रारूप में जानकारी मांगी है।
याचिकाकर्ताओं से निर्धारित प्रारूप में मांगी जानकारी
आयोग ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक अभ्यर्थी का नाम, अनुक्रमांक, विषय, श्रेणी और प्राप्तांक का विवरण सौंपें। इसके साथ ही, जिन मामलों में कथित तौर पर कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया है, उन नियुक्त अभ्यर्थियों का नाम, अनुक्रमांक, विषय, श्रेणी, प्राप्तांक, नियुक्ति की तारीख और जिला भी बताना होगा। जांच आयोग इन प्राप्त तथ्यों के आधार पर पता लगाएगा कि नियुक्तियां राज्यस्तरीय मेधा सूची के प्रावधानों के अनुरूप हुई थीं या नहीं।
चयन आयोग से संशोधित मेधा सूची पर मांगा जवाब
जांच आयोग ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से वर्ष 2016 की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक भर्ती परीक्षा के संबंध में कई सवाल पूछे हैं। चयन आयोग को बताना होगा कि विषयवार कुल कितने अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे और उनमें से कितने अभ्यर्थियों का परिणाम घोषित किया गया था। इसके साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि परीक्षा का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया था अथवा नहीं।
अनुसूचित क्षेत्रों के 13 जिलों में स्थानीय अभ्यर्थियों को आरक्षण देने वाली अधिसूचना के रद्द होने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2 अगस्त 2022 को इस आदेश की पुष्टि किए जाने के बाद राज्यस्तरीय संशोधित मेधा सूची तैयार की गई थी या नहीं, इसका स्पष्ट जवाब मांगा गया है। आयोग ने इस संबंध में जारी सूची, नियुक्ति की अनुशंसाओं, संबंधित अधिकारियों के नाम तथा उस समय कार्यरत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रक का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत करने को कहा है।
शिक्षा विभाग को देना होगा नियुक्तियों का ब्योरा
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद यानी 2 अगस्त 2022 के पश्चात प्राप्त हुई नियुक्ति अनुशंसाओं की तिथियां और उनकी प्रतियां मांगी हैं। विभाग को नियुक्त अभ्यर्थियों की विषयवार और श्रेणीवार सूची, उनके प्राप्तांक, नियुक्ति की तारीख तथा आवंटित जिले का ब्योरा देना होगा। राज्यस्तरीय मेधा सूची से बाहर जाकर की गई नियुक्तियों, उनके कारणों और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई है।
इसके अतिरिक्त वर्ष, 2019 में पद पर योगदान न देने वाले अभ्यर्थियों के स्थान पर की गई नई नियुक्तियों, पूर्व में निरस्त किए गए अभ्यर्थियों की बाद में हुई नियुक्तियों, कुल स्वीकृत पदों तथा वर्तमान में रिक्त पदों का पूरा ब्योरा विभाग को सौंपना होगा।
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अधूरा जवाब देने पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि टालमटोल वाला या अधूरा जवाब देने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे आचरण को जानबूझकर की गई अवहेलना या मिलीभगत के रूप में देखा जाएगा। अब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग, शिक्षा विभाग और याचिकाकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज के आधार पर ही जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।