उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि सेवा, संवेदना और दयाभाव को अपने पेशे का मूल आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों के लिए डॉक्टर सबसे बड़ा सहारा होते हैं, क्योंकि संकट के समय किसी व्यक्ति के जीवन की बागडोर उनके हाथों में होती है। ऐसे में चिकित्सकों को अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए। वह देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षा समारोह को संबोधित कर रहे थे।
विकसित भारत के लक्ष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र की अहम भूमिका
दीक्षा समारोह में उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में स्वास्थ्य क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा समाज को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाती है और एम्स जैसी शीर्ष संस्थाएं राष्ट्रीय विकास के इस लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
देश में मेडिकल कॉलेज और सीटों की संख्या में बढ़ोतरी
चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि पहले देश में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 380 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 846 हो गई है। इसी तरह एमबीबीएस की सीटें 51 हजार से बढ़कर 1.39 लाख तक पहुंच गई हैं। स्नातकोत्तर यानी पीजी की सीटों की संख्या भी 31 हजार से बढ़कर 86 हजार हो गई है। उन्होंने कहा कि बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता की बुनियादी जरूरत हैं। चिकित्सा शिक्षा का विस्तार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
चिकित्सा शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी पर जताई खुशी
उपराष्ट्रपति ने चिकित्सा शिक्षा में छात्राओं की लगातार बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। नर्सिंग और पैरामेडिकल के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव हैं। मरीजों की देखभाल और उपचार व्यवस्था में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
एआई के दौर में भी मानवीय संवेदना जरूरी
आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल को उपयोगी बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह चिकित्सक के मानवीय स्पर्श, सहानुभूति और संवेदना का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मरीजों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखें। इस अवसर पर उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके साहस, स्वाभिमान और बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों को दिलाया नशा न करने का संकल्प
बाबा बैद्यनाथ की पवित्र नगरी देवघर में उपस्थित होने को सौभाग्य बताते हुए उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह में शामिल विद्यार्थियों को नशा न करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की भी अपील की। कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा और देवघर के विधायक सुरेश पासवान उपस्थित रहे। इसके अलावा एम्स देवघर की अध्यक्ष एमवी पद्मा श्रीवास्तव और संस्थान के निदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) प्रो. डॉ. नितिन एम. गंगने सहित अन्य गणमान्य लोग भी समारोह में शामिल हुए।